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Azamgarh News: बीते आठ दिन में सिर्फ 12 मिलीमीटर हुई बारिश, अभी तक सिर्फ 20 फीसदी हुई धान की रोपाई

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बरदह क्षेत्र में निजी संसाधनों से धान की रोपाई करते किसान। संवाद
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आजमगढ़। जुलाई के पहले सप्ताह में ही मानसून कमजोर हो गया है। इससे धान की रोपाई पर संकट आ गया है। पानी के निजी इंतजामों से अभी तक किसान सिर्फ 20 प्रतिशत ही धान की रोपाई कर पाए हैं। जुलाई महीने के शुरुआती आठ दिनों में लगभग 12 मिलीमीटर बारिश हुई है। बीते पांच वर्षों के बारिश के आंकड़े बताते हैं कि जिले में मानसून की शुरुआत लगातार अनिश्चित होती जा रही है। मौसम के इस बदले मिजाज ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ फसलों की बोआई ज्यादातर जून की शुरुआती बारिश पर निर्भर रहती है। जुलाई से धान की रोपाई शुरू हो जाती है। बीते जून में 26.82 मिलीमीटर बारिश हुई है। जो सामान्य से काफी कम है। मौसम विभाग पिछले साल की तुलना में इस साल कम बारिश होने का पहले ही अंदेशा जता चुका है। जिले में इस बार 1.69 लाख हेक्टेयर में धान के रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। बरदह क्षेत्र के किसान किशन मुरारी राय, बूढ़नपुर क्षेत्र के किसान रामानंद वर्मा, मेंहनगर क्षेत्र के किसान विनोद सिंह ने बताया कि बारिश नहीं होने और नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से लेट पकने वाली धान की फसल प्रभावित होगी। कारण कि किसान पहले उसी की रोपाई करते हैं। मानसून का यही हाल रहा तो रोपाई और उत्पादन दोनों पर असर पड़ेगा।
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किसान श्रीअन्न की बोआई का रखें विकल्प
जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी ने बताया कि अगर यही हाल रहा तो सबसे ज्यादा असर धान की फसल पर पड़ेगा। रोपाई और उत्पादन और घट जाएगा। ऐसे में किसान मूंग, उड़द, अरहर और कोदो, सांवा अन्य मोटे अनाज की बोआई का विकल्प रखें। वैसे भी मोटे अनाज की खेती पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
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वर्षवार जुलाई में वर्षा की स्थिति (मिमी में)
2022- 116.96
2023- 111.13
2024- 169.98
2025- 121.20
2026- 12 (अब तक)
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