कवि सम्राट ‘हरिऔध’ की जयंती पर शनिवार को निजामाबाद कस्बा में संगोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर लोगों ने ‘हरिऔध’ जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। साथ ही उनके जीवन पर प्रकाश डाला। इस दौरान लोगों ने उनकी जन्मस्थली पर पुस्तकालय बनवाने की मांग उठाई।
प्रिय प्रवास के रचयिता पं. अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जी की जयंती निजमाबाद बाईपास के पास स्थित उनकी प्रतिमा के पास मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत महाकवि की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया गया। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि शिक्षाविद् हरिमंदिर पांडेय ने कहा कि खड़ी बोली को काव्य भाषा पथ पर प्रतिष्ठा दिलाने वाले पं. अयोध्या सिंह ‘हरिऔध’ ने पहला महाकाव्य प्रिय प्रवास लिखकर हिंदी भाषा को समृद्ध किया।
उनका जन्म कस्बे में 15 अप्रैल 1865 में हुआ और निधन 16 मार्च 1945 को हुआ। उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ ही उनका पैतृक आवास खंडहर हो गया है लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। उन्होंने शासन से ‘हरिऔध’ जी की जन्मस्थली पर पुस्तकालय बनवाने की मांग की। समारोह की अध्यक्षता नगर पंचायत अध्यक्ष प्रेमा यादव और संचालन बार के पूर्व अध्यक्ष रणविजय राय एडवोकेट ने किया। इस मौके पर जितेंद्र हरि पांडेय, बार के पूर्व अध्यक्ष पन्नालाल यादव एडवोकेट, काली प्रसाद राय, आफताब आलम कुरैशी, संतोष गोंड, चंद्रेश यादव, इसरार हसन आदि मौजूद रहे।