ग्राम डिघिया में नौहा मातम करते अंजुमन के लोग। संवाद
फूलपुर। करबला में शहीद हजरत इमाम हुसैन की याद में बीसवें पर कस्बे तथा ग्रामीण क्षेत्रों के शिया आबादी वाले इलाकों में बुधवार को मजलिसों का आयोजन किया गया। मजलिसों में उलेमाओं ने कर्बला की घटनाओं का जिक्र करते हुए इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानी को इंसानियत, सत्य और न्याय की मिसाल बताया। महिलाओं ने भी घरों में मजलिसें आयोजित कर मरसिया और नौहा पढ़ते हुए खिराज-ए-अकीदत पेश किया। मौलाना कमर अब्बास रिजवी ने अपने बयान में कर्बला की घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके खेमों में आग लगा दी गई और परिवार की महिलाओं व बच्चों को बंदी बना लिया गया। उन्होंने कहा कि बीसवें की मजलिस का उद्देश्य करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना और उनकी कुर्बानी के संदेश को लोगों तक पहुंचाना है। देर शाम तक ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजलिसों का सिलसिला जारी रहा।