लाटघाट। घाघरा की कटान से अब तक 1300 घर और 14 गांव का अस्तित्व खत्म हो चुका है। इसके बाद भी अब तक सगड़ी तहसील के उत्तरी सीमा से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी की कटान का हल शासन और प्रशासन नहीं निकाल सका है। जिसका खामियाजा आज भी देवारा क्षेत्र के लोग भुगत रहे है। 1990 से अब तक घाघरा नदी की लगातार कटान होती गई और लोग बेघर होते गए। 2020 में वासु का पूरा का अस्तित्व खत्म हुआ और सहायता एक भी नहीं मिली। देवारा खास राजा गांव के विस्थापितों को अभी तक कब्जा भी नहीं दिलाया गया। घाघरा नदी के कटान से 1990 में पूरा उर्दिहा गांव का अस्तित्व खत्म हुआ, जिसमें 450 घर थे। 1990 में ही बगल के गांव रोशनगंज में 300 से अधिक घर घाघरा नदी में विलीन हो गए। 2005 और 06 में धुसवां और ठीकहिया के 200 घर नदी में समा गए। 2010 में देवारा खास राजा के रमयी के पूरा के 22, गया के पुरवा के 13 घर, मुरारी के पूरा के 18, त्रिलोकी के पुरा का 21 घर, बासु के पूरा के 08 घर, बगहवा के 13 घर, जागबली का पूरा के 6 घर, घाघरा में विलीन हो चुके हैं। वही चक्की हाजीपुर 150 घर घाघरा में विलीन हो चुका है। धीरे-धीरे घाघरा नदी काटते हुए करीब 10 किमी से अधिक उत्तर से दक्षिण बढ़ती गई और आज घाघरा नदी महुला गढ़वल बांध के करीब टकराने को है। वहीं घाघरा की कटान से कई सौ घर घाघरा में विलीन हो चुके हैं। वही विस्थापितों को जमीन नहीं मिली तो किसान भूमिहीन होते चले गए। तहसीलदार सगड़ी अभिषेक सिंह ने बताया कि पट्टे की कार्रवाई चल रही है। जल्द ही सभी को पट्टे मिल जाएगा। वहीं एसडीएम सगड़ी राजीव रतन सिंह ने बताया कि अभी किसी कार्य में व्यस्त हैं इस मामले में बाद में बात करेंगे।