दोनों बेटियां व उनकी मां दरवाजे पर खड़े होकर मदद की गुहार लगाती रहीं लेकिन कोरोना के डर से कोई भी उनके घर नहीं पहुंचा। शवों को घाट तक पहुंचाने के लिए भी कोई तैयार नहीं था। बार-बार फोन करने पर स्वास्थ्य विभाग ने कुछ पीपीई किट व एंबुलेंस की व्यवस्था कराई। इसके बाद वाराणसी से आए मृतक के साले के पुत्र व साथ काम करने वाले दो लोगों ने मिल कर दोनों मृतकों के बॉडी को थ्री लेयर पॉलिथीन में पैक किया और फिर एंबुलेंस में लादकर शवों को राजघाट ले गए। वहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।
उनकी मौत कोरोना से हुई इसकी पुष्टि नहीं हो पाई, दोनों ने जांच भी नहीं कराई थी। लक्षण के आधार पर ही उनकी मौत का कारण कोरोना माना जा रहा है। उनकी मौत के बाद सभासद विशाल श्रीवास्तव व मुहल्ले के अन्य लोगों के हो-हल्ला मचाने पर नगर पालिका की टीम से पूरे मुहल्ले के साथ ही मृतकों के घर में सैनिटाइजेशन कराया गया।
पत्नी व बेटियों की जांच को नहीं पहुंची टीम
आजमगढ़। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि एक ही परिवार में दो-दो लोगों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम अब तक मृतकों के परिजनों की जांच को नहीं पहुंची है। सभासद विशाल श्रीवास्तव का कहना है कि सीएमओ साहब ने तो साफ-साफ कह दिया कि टीम खाली नहीं है। जबकि नियमानुसार परिवार के सदस्यों की जांच कराई जानी चाहिए। पिता व ताऊ की मौत के बाद दोनों बेटियों व उनकी मां का काफी बुरा हाल है।