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खाते में पैसा ही नहीं कहां से खिलाएं खाना

Wed, 02 Sep 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आजमगढ़
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एमडीएम न बनने पर मंगलवार को सिकरौरा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं हंगामा किया और बैग उठाकर घर जाने लगे। शिक्षकों की सूचना पर स्कूल पहुंचे नायब तहसीलदान शिवराम ने बच्चों को समझा-बुझाकर शांत कराया। वहीं प्रधानाध्यापक का कहना है कि खाते में पैसा ही नहीं आया है तो कहां से बच्चों को खाना खिलाया जाए। 
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 बता दें कि पूर्व में विद्यालयों पर एमडीएम की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक के संयुक्त रूप से दी गई थी। लेकिन उसमें बदलाव करते हुए अब केवल शिक्षकों के जिम्मे एमडीएम का कार्य सौंप दिया गया है। सिकरौरा प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामकुंवर सिंह ने बताया कि शासन स्तर पर बीते जून माह में हमें 60 किलोग्राम गेहूं और एक कुंतल 40 किग्रा चावल मिला था। तीन माह बीत जाने के बाद भी अब तक राशन नही दिया गया है।

 जबकि उक्त विद्यालय में कुल 145 छात्र-छात्राओं का नामांकन है। प्रधानाध्यापक ने कहा कि जूनियर व प्राथमिक विद्यालय का सामूहिक एमडीएम बनवाकर दो माह हमने किसी प्रकार से गुजारा किया। लेकिन राशन पूरी तरह समाप्त हो गया और जूनियर विद्यालय से हमें मिलना बंद हो गया तो हम असमर्थ हो गए। एमडीएम न बनने के कारण इस बात पर बच्चों ने हंगामा किया। उधर, मौके पर पहुंंचे नायब तहसीलदार शिवराम ने बताया कि हमने उच्चाधिकारियों को अपनी रिपोर्ट के माध्यम से सूचित कर दिया है, जल्द ही कोई निर्णय सामने आ जाएगा।
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