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दिवाली से पहले ही निजामाबाद के टेराकोटा शिल्पकारों को मिला उपहार

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निजामाबाद। कस्बा स्थित हुसैनाबाद के कलाकारों द्वारा बनाई गई मिट्टी कलाकृति पूरे विश्व में पहचान बना चुकी है। इन दिनों हुसैनाबाद मोहल्ला निवासी महेंद्र प्रजापति के साथ-साथ दस हस्तशिल्प कलाकारों का नाम भी सुर्खियों में है। महेंद्र प्रजापति को अब करीब छह लाख रुपये में दीया बनाने का आर्डर कैंसर पेशेंट एसोसिएशन टाटा ट्रस्ट मेमोरियल मुंबई से मिला हैं, जो आर्डर मिलने के बाद 30 तरह के टेराकोटा के दीये को पैक करके भेजने की तैयारी में लगे हुए हैं। महेंद्र प्रजापति अपने दो महिला और दो पुरुष हस्तशिल्प कलाकारों के साथ मिलकर पूरे साल दीया का कारोबार करते हैं, जिसमें मुख्य रूप से पेंटिंग दीया, दलोट दीया ,सादा दीया, मीडियम दीया ,डेजी दीया, ओरिएंटल दीया, झूमर दीया, शंख दीया सहित लगभग 40 किस्म की दीयों का कारोबार होता है। इन्हें गुजरात,अहमदाबाद, सूरत, मुंबई ,कोलकाता, पुणे, दिल्ली आदि जगहों से आर्डर मिलता रहता है। महेंद्र बताते हैं कि इस समय उन्हें लगभग 6 लाख रुपये का आर्डर मिला है। यह आर्डर कैंसर पेशेंट एसोसिएशन टाटा ट्रस्ट मेमोरियल मुंबई महाराष्ट्र से इनके पास मिला है। एक जिला एक उत्पाद के तहत निजामाबाद की मिट्टी के कारोबार को नई पहचान मिल गई है, जिससे दिन प्रतिदिन कारोबार में वृद्धि होती जा रही है। पूरे साल निजामाबाद में मिट्टी के कारोबार से लगभग करोड़ों रुपये का काम किया जाता है। सबसे ज्यादा सितंबर, अक्तूबर महीने में यह कार्य होता है। इस दीये के कारोबार से कई परिवार का जीविकोपार्जन भी चलता है। इस समय टेरा कोटा का लगभग 25 लाख रुपये का आर्डर मिला हुआ है। जिसे संबंधित लोगों को भेजने की तैयारी चल रही है। लगभग 20 लाख से ऊपर का दीया भेज दिया गया है। हस्तशिल्प कलाकार टेराकोटा के महेंद्र प्रजापति ने बताया कि काफी मेहनत से तैयार करके माल को भेजने में हम लोग को पूरा साल लग जाता है। अगर एक बेहतर ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था निजामाबाद से हो तो कारोबार में और वृद्धि हो जाएगी। इसकी मांग कई बार की जा चुकी है, लेकिन शासन स्तर से एक बेहतर रोडवेज ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
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