त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव दो मई की मतगणना के बाद संपन्न हो चुका है। आदर्श आचार संहिता भी हटाई जा चुकी है। शासन की ओर से 27 मई को नव निवाचित ग्राम प्रधानों को शपथ दिलाने का निर्देश जारी कर दिया गया है। लेकिन कोरम में अभाव में जनपद के 859 ग्राम प्रधान शपथ ग्रहण नहीं कर सकेंगे। इन ग्राम प्रधानों को अब आयोग द्वारा घोषित किए जाने वाले उपचुनाव का इंतजार करना होगा।
हाल में संपन्न हुआ ग्राम पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान के 1858, ग्राम पंचायत सदस्य के 22820 पदों के लिए चुनाव संपन्न कराया गया था। इस चुनाव में ग्राम प्रधान पद को लेकर लोगों में काफी क्रेज देखने को मिला। जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य पद की ओर भी लोगों का रूझान रहा लेकिन ग्राम पंचायत सदस्य पद की ओर किसी का भी रूझान देखने को नहीं मिला। जिसका परिणाम रहा कि जिले में 3000 से अधिक ग्राम पंचायत सदस्यों के पद खाली रह गए। इस दौरान ग्राम पंचायत सदस्य पद के दाखिल नामांकन पत्रों की स्थिति पर नजर डालें तो कुछ वार्डों को छोड़कर शेष वार्डों में इनका निर्विरोध निर्वाचन हो गया। लेकिन ग्राम पंचायत सदस्य पद की अहमियत अब समझ में आ रही है। क्योंकि जिन ग्राम पंचायतों में सदस्यों की संख्या दो तिहाई से कम है उस गांव के नव निर्वाचित ग्राम प्रधान शपथ नहीं ग्रहण कर पाएंगे। जनपद की 1858 ग्राम पंचायतों में मात्र 999 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनका कोरम पूरा है। इन गांवों के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों को 27 मई को शपथ दिलाई जाएगी। जबकि 859 ग्राम पंचायतों में कोरम पूरा न होने के कारण नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान शपथ ग्रहण नहीं कर पाएंगे। अब इनको होने उपचुनाव का इंतजार करना होगा।
कोट
शासन की ओर से 27 मई को ग्राम पंचायतों के गठन के लिए शपथ ग्रहण कराने का निर्देश दिया गया है। इसमें सिर्फ 999 ग्राम प्रधान ही शपथ ले सकेंगे क्योंकि इनका ही कोरम पूरा है। शेष लोगों को उपचुनाव का इंतजार करना होगा। इन गांवों में एडीओ पंचायत प्रशासक के रूप में कार्यभार देखेंगे।
लालजी दुबे, डीपीआरओ।