प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री आजम खां की भाषा असंसदीय जरूर है पर मैने उनकी बर्खास्तगी की बात कभी नहीं की। यह मीडिया का अपने तरीके से किया गया आकलन है। विधानसभा अध्यक्ष के साथ मुख्यमंत्री को पत्र की कापी भेजने का मकसद यह था, कि वह जानें की उनकी सरकार के वरिष्ठ नेता व संसदीय मंत्री का व्यवहार कैसा है। राज्यपाल राम नाईक ने ये बातें मंगलवार को बूढ़नपुर तहसील के अजगरा गांव में एक महाविद्यालय के लोकार्पण के बाद पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहीं।
राज्यपाल ने कहा कि विधानसभा में बोलने की जो आजादी है, उसका उपयोग करते हुए आजम खां ने ऐसी बातें कहीं जो संसदीय नहीं हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी 60 पंक्तियों में से 30 को निकाला है, इससे स्पष्ट है कि संसदीय कार्य मंत्री व्यवहारिक रूप से असंसदीय हैं। उन्होंने कहा कि सभागार में जिस समय आजम खां ने टिप्पणी की, सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वहां मौजूद थे।
उन्होंने सवाल किया कि सभागार में हुई बातें दूसरे दिन अखबारों में कैसे आ गई? विधानसभा अध्यक्ष इसे क्यों नहीं रोक पाए। हम भी विधानसभा और संसद में काम कर चुकें हैं, ऐसे मामलों को अध्यक्ष रोक देता है। इसी वजह से जो पत्र मैने विधानसभा अध्यक्ष को भेजा था, उसकी एक प्रति मुख्यमंत्री को भी भेजी। उन्होंने कहा कि जब यह मामला सार्वजनिक हो चुका है तो इसका निस्तारण भी सार्वजनिक रूप से किया जाना चाहिए। जब मुख्यमंत्री से मुलाकात होगी तो इस विषय पर वे उनसे चर्चा भी करेंगे।
जम्मू कश्मीर में छात्रों पर हुए लाठी चार्ज के सवाल उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत सरकार काम कर रही है, लेकिन मेरा मानना है कि छात्र किसी प्रदेश का हो उनकी सुरक्षा होनी चाहिए। वैसे मुझे इस मामले में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन मुझे विश्वास है कि केंद्र और जम्मू कश्मीर की सरकार मिलकर समस्या का हल निकाल लेंगी। इससे पूर्व महाविद्यालय के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजकल शिक्षा धंधा बन गई है। डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में मैंने देखा कि नकल कराकर सर्टिफिकेट देना इस धंधे का एक हिस्सा है। जबकि उन्हें नहीं मालूम कि नकल समाज के लिए कैंसर के समान है।