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Azamgarh News: तुमको मेरा प्रणाम मुल्क पर मरने वाले ...

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उप्र साहित्य सभा की ओर से रविवार की देर शाम नगर के एक होटल सभागार में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि व सभा के संरक्षक प्रभु नारायण पांडेय प्रेमी ने किया।
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गोष्ठी का शुभारंभ राकेश पांडेय सागर की सरस्वती वंदना से हुआ। कृष्णा आजमगढ़ी ने अपनी बेहतरीन रचना “मेरे सरगम को अपने स्वर दे जरा, गीत यूं ही मिलन के बनाता रहूं” से लोगों की वाहवाही लूटी। कवि रत्नेश राय “बालपन मेरा फिर से दिला दीजिए, दुर्गा आंचल में मां के सुला दीजिए” के जरिए मां की ममता का बखान किया। हास्य व्यंग की कवि शैलेंद्र मोहन राय अटपट ने “प्यारे पति सेवक बनो सुबह पिलाओ चाय” सुना कर लोगों पर हास्य की बरसात की। अमरीश श्रीवास्तव अंबर ने वर्तमान परिवेश पर अपनी रचना “तुमने कई त्योहारों को किया है खराब तुम्हें क्या शर्म नहीं आती है शराब” सुनाई।
जितेंद्र कुमार नूर ने “जहां भी इश्क का चर्चा चलेगा, हमारा जिक्र ही पहला चलेगा” सुनाया। संजय कुमार पांडेय ने सांप्रदायिक सद्भाव एवं भाईचारा बनाए रखने के लिए अपया मुक्तक “आज इस देश में यू माहौल बनाना होगा आग लगने की जगह फूल खिलाना होगा” प्रस्तुत किया। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार प्रभु नारायण पांडेय प्रेमी ने देश प्रेम पर अपनी रचना “तुम को मेरा प्रणाम मुल्क पर मरने वाले, हंसते-हंसते हुए फांसी पर वो चढ़ने वाले” सुनाया तो पूरा माहौल गहरी राष्ट्रीयता में सांस लेने को मजबूर कर दिया।
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मुख्य अतिथि जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि कविता मनोरंजन का साधन नहीं है कवि अपनी कविताओं से समाज में आपसी सद्भाव एवं भाईचारे का संदेश देता है। विशिष्ट अतिथि श्रम प्रवर्तन अधिकारी शशिकांत पांडेय ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है। इस दौरान समाजसेवी कृपा शंकर पाठक, संजीव तिवारी, अनिल विश्वकर्मा, शिव चंद्र विश्वकर्मा, अमरेंद्र राय आदि उपस्थित रहे।
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