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अमारी देख छलछला उठी आंखें

Thu, 29 Oct 2015 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
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क्षेत्र के चमावां गांव स्थित बुद्धु खां मस्जिद से बुधवार को जुलूस-ए-अमारी अकीदत के साथ निकाला गया। इस दौरान अमारी देख अजादारों की आंखे छलछला उठीं।
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जबकि इससे पूर्व हुई मजलिसों में नौहा और मातम में वह करबला के मयासब सुनकर रो उठे। या हुसैन, या अब्बास की दर्दभरी सदांए जुलूस के दौरान लोगों को कर्बला की याद दिलाती रही।

जबकि मजलिस में उलेमा ने करबला के मैदान में इमाम हुसैन की शहादत का बयान किया। जुलूस का आगाज कुरआन पाक की तिलावत से हुआ। इसके बाद तीन अमारियां बरामद की गई।
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सबसे आगे हजरत अब्बास का अलम, जुलजनाह और आबिदे बीमार का ताबूत लोग लेकर चल रहे थे। जगह-जगह मजलिसें आयोजित की गई।

जिसमें मौलाना सैयद कैसर अब्बास, मौलाना जीशान अली, मौलाना शारिब अब्बास, सैयद गुलाम हसनैन ने तकरीर की। अंजुमनो ने नौहा मातम और सीना-जनी की।

अंजुमन हैदरिया सुल्तानपुर, सिपाहे हुसैनी शादात, सज्जादिया कोपागंज, गुलशने इस्लाम मित्तूपुर ने नौहा मातम पेश कर खिराज-ए-अकीदत पेश की।

 ताबूत पर अजादारों ने फूल-माला चढ़ाकर मन्नतें मांगी। समापन से पहले मुकामी अंजुमन फरोगे अजा जुलूस को लेकर हजरत अब्बास के रौजा तक पहुंची।

 जुलूस का समापन रौजा रसूल पर किया गया। निजामत सहेर अरशी और डा. शउर ने संयुक्त रूप से किया। अंत में रजिउल हसन प्रधान, और जफर अब्बास एडवोकेट ने जुलूस में आए जायरीनो का आभार जताया।

जबकि उधर सुरक्ष्ाा को लेर प्रशासन भी मुस्तैद रहा। जुलूस के साथ पुलिस के जवान भी रास्ते भर चल रहे थे।
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