जनपद में कई सरकारी सरकारी कार्यालय आज भी जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं। जहां कार्य करते हुए कर्मचारियों को हमेशा दुर्घटना होने का भय सताता रहता है। वहीं नगर क्षेत्र में आज भी बहुत से लोग जर्जर भवनों में अपना आशियाना बनाए हुए हैं। अपने कर्तव्यों से बेपरवाह नगरपालिका आज तक नगर क्षेत्र के जर्जर भवनों का चिह्नीकरण भी नहीं कर सकी है।
जनपद स्थित जिला पूर्ति कार्यालय और खाद्य एवं प्रसंस्करण विभाग वर्षाें से जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। लेकिन अभी तक भवन की मरम्मत के कोई उपाय नहीं किए गए जिसके कारण कर्मचारियों को हमेशा दुर्घटना होने का भय सताता रहता है। तहबरपुर विकास खंड परिसर में बना पशु चिकित्सा केंद्र जर्जर हो गया है। भवन के छत का प्लास्टर टूट-टूटकर गिर रहा है। अजमतगढ़ विकास खंड के पकवाइनार स्थित कृषि रक्षा इकाई का भवन जर्जर है।
भवन की छत से पानी टपकता है। इसकी दीवारें जगह से फट चुकी हैं। कर्मचारी जान हथेली पर रखकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। नगर क्षेत्र में नगरपालिका द्वारा अब तक जर्जर भवनों का चिन्हीकरण नहंीं किया जा सका है। नगर कोतवाली के सामने बंधे के पार जर्जर भवन, पुरानी कोतवाली दलालघाट रोड पर बनी धर्मशाला जर्जर हो चुकी है। धर्मशाला की रेलिंग और प्लास्टर आए दिन टूटकर सड़क पर गिरते रहते हैं। जिसके कारण आवागमन करने और अगल-बगल रहने वालों को हमेशा दुर्घटना होने का भय सताता रहता है।
नगर क्षेत्र में दर्जनों ऐसी इमारतें हैं, जिनमें लोग जान हथेली पर लेकर निवास करते हैं। इन भवनों का चिह्नीकरण करने के बजाए नगरपालिका लोगों के प्रार्थना पत्र का इंतजार कर रहा है। जबकि पिछले दिनों हुई हल्की बारिश में ही जनपद के कई क्षेत्रों में कच्चे और जर्जर मकान गिरने से जन-धन की हानि हुई थी।