निजामाबाद। श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भैरोपुर कला गांव स्थित मां शीतला माता का दरबार चैत्र नवरात्र के लिए तैयार होने लगा है। नवरात्र में यहां भारी संख्या में मत्था टेकने के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रत्येक महीने के सोमवार और शुक्रवार को मां के दरबार में मेले का आयोजन भी किया जाता है। नवरात्र में माता के दरबार में सुबह-शाम आरती और भजन का आयोजन होता है।चैत्र नवरात्रि के आगमन से पहले मां के दरबार को सजाने की तैयारी चल रही है। चारों तरफ रंगाई-पुताई और सफाई का कार्य लगभग पूर्ण कर लिया गया है। मंदिर कैंपस और मां शीतला दरबार के गुंबद को झालरों से सजाने की तैयारी चल रही है। जगह-जगह नारियल, चुनरी की दुकान लगाई जा रही है। नवरात्रि के नौ दिन मां के दरबार में मत्था टेकने वाले श्रद्धालुओं की तादाद हजारों में रहती है। मां शीतला को गौरा का अवतार भी कहा जाता है। किवदंति के अनुसार राजा दक्ष की पुत्री सती भगवान शंकर से शादी करना चाहती थी। राजा नहीं चाहते थे कि उनकी पुत्री का विवाह भगवान शिव से हो। राजा दक्ष ने अपने यहां पर यज्ञ का आयोजन किया। सभी लोगों को निमंत्रण दिया लेकिन राजा दक्ष ने भगवान शंकर को निमंत्रण नहीं दिया। यज्ञ के समय राजा दक्ष की पुत्री सती जब वहां पहुंची भगवान शंकर को न पाकर क्रोधित हुईं।
यज्ञशाला में कूद गई। भगवान शंकर वहां पहुंचे और सती को हवन कुंड से बाहर निकाल कर चल दिए। मार्ग से जाते हुए यहां सती के कुछ रक्त की बूंदे गिरी थी। तब से यह धार्मिक स्थल मां शीतला के रूप में जाना जाता है। प्रत्येक नवरात्र में प्रशासन की तरफ से पुलिस की व्यवस्था की जाती है।