नगर के रेलवे स्टेशन के सामने खड़े सवारियों के इंतजार में खड़े ई रिक्शा। संवाद
बलिया। जिले में नगर से लेकर ग्रामीण इलाकों में ई-वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। वाहनों की संख्या बढ़ने के बावजूद चार्जिंग के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ई-वाहन रखने वाले घरेलू कनेक्श से ही वाहनों की बैटरी चार्ज कर रहे हैं। जिले में ई-रिक्शा समेत अन्य 15978 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हैं। लोगों को घरेलू कनेक्शन से काम चलना पड़ रहा है। लोग इलेक्ट्रानिक वाहनों की खरीदारी कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा दोपहिया व तिपहिया वाहन शामिल हैं। चार पहिया वाहन की तरफ लोगाें का रुझान है लेकिन चार्जिंग की समस्या भी है। बलिया में एनएच-31 की लंबाई लगभग 90 किमी है। इससे प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहनों की आवाजाही है। इस 90 किलोमीटर की दूरी में इलेक्ट्रिक वाहन से सफर कर रहे लोगों को समस्या बनी हुई है। बैटरी डाउन होने की स्थिति में सुविधा नहीं मिलने पर वाहन में पेट्रोल ही भरवाना पड़ता है।
15 हजार ई-रिक्शे पंजीकृत
संभागीय परिवहन कार्यालय में 15 हजार ई-रिक्शे पंजीकृत हैं। 793 स्कूटर व मोटरसाइकिल पंजीकृत हैं। चार्जिंग पाॅइंट नहीं होने से सभी घर पर ही चार्ज करते हैं। इससे घरेलू बिजली खर्च होती है। इसमें शहर में लगभग 5 हजार से अधिक ई-रिक्शाें का संचालन होता है। शहर के कुछ क्षेत्रों में अवैध रूप से ई-रिक्शा चार्जिंग सेंटर जरूर बने हैं लेकिन कनेक्शन घरेलू ही है। ऐसे स्टेशन चलाने वाले मोटी धनराशि वसूल करते हैं।
जिले में अब तक चार्जिंग पाॅइंट के लिए एक भी आवेदन नहीं आया है। कुछ लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए पहल भी की जा रही है। अवैध तरीके से चाॅर्जिंग करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। - इं. लाल सिंह, अधिशासी अभियंता, विद्युत विभाग।