उन्होंने आगे कहा कि अखिलेश यादव कभी रोहिणी आयोग, कभी सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट की बात करते हैं और न ही सदन में कभी चर्चा नहीं करते। न ही पाल, प्रजापति, बिंद, केवट, मल्लाह, राजभर, चौहान, कर्कबंशी, बंजारा, दर्जी जैसे पिछड़े समाज की आवाज उठाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश सरकार ने न पिछड़ों के लिए आईएएस-पीसीएस कोचिंग सेंटर खोला और न ही गरीबों के लिए कोई ठोस पहल की। जबकि एनडीए सरकार ने 18 मंडलों में गरीब बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय खोले हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जल्द ही मदरसा बोर्ड में भी यूपी बोर्ड, आईसीएसई और सीबीएसई की तरह पठन-पाठन की व्यवस्था लागू की जाएगी। अब मदरसों में नियुक्ति भी आयोग से होगी।