पूरे जनपद में नाग पंचमी का पर्व धूमधाम से हर्षोल्लास पूर्ण वातावरण में मनाया गया। जगह-जगह लोगों ने पेड़ों की डालों पर पड़े झूले का आनंद लिया। वहीं, युवाओं ने कबड्डी, कुश्ती, चिकई आदि खेलों में अपने हाथ आजमाए।
नाग पंचमी पर शहर क्षेत्र में जहां लोग अपने घरों की साफ करने में लगे थे। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं घरों में गोबर का लेपन कर घर को साफ सुथरा बनाने में जुटी थी। साफ-सफाई के बाद घरों में लावा और दूध का छिड़का किया गया। तब हलवा आदि का नाश्ता कर मतवालों की टोली घरों से निकली और जोर आजमाइश में जुट गई। गांव-गांव कबड्डी, कुश्ती, चिकई आदि प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसके बाद लोगों नहा धोकर घरों में बने पुड़ी आदि पकवानों का लुत्फ उठाया। फिर निकले झूला झूलने के लिए।
हालांकि पहले की तरह अब पेड़ों पर झूले देखने को तो नहीं मिले लेकिन जहां भी दिखे उन पर महिलाओं और युवाओं की संख्या ज्यादा रही। महिलाओं द्वारा गाई जा रही कजरी से वातावरण में एक विशेष स्वर गूंज रही थी, जो कानों को ठंडक पहुंचा रही थी। जनपद में कई स्थानों पर कुश्ती तो कई स्थानों पर कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
वहीं, भारतीय संस्कृति कला केंद्र ने नाग पंचमी पर श्री कृष्ण गौशाला पहाड़पुर में कजरी उत्सव का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत पंडित शीतला मोहन मिश्र बंधुु ने 'भोलेबाबा का दर्शन करा दा पिया, देवघर घुमा दा पिया ना' से की। इसके बाद अन्य कलाकारों ने एक से बढ़कर एक कजरी गीत की प्रस्तुति की। अमिलो संवाददाता के अनुसार, रविवार को नाग पंचमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ पूरे क्षेत्र में मनाया गया। श्रद्धालुओं ने नाग देवता को प्रसन्न करने के लिए दूध और लावा का चढ़ावा दिया लेकिन झूला और कजरी की मधुर धुन सुनने को नहीं मिली।
लालगंज संवाददाता के अनुसार, विकास खंड के खनियरा गांव में नागपंचमी पर रविवार को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें लोक गीत गायक निशिकांत दुबे उर्फ निशू बाबा ने अपने कजरी गीतों पर सभी को झूमने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ 'रिमझिम बरसे ला रे सवनवां, मईया मोरी झूले झुलनवा ना' से किया। इसके बाद उन्होंने 'पिया मेहंदी मंगा दा मोती झील से, जाईके साईकिल से ना', 'सखी घेर आयी कारी रे बदरिया ना' सुनाकर कर सभी का दिल जीत लिया। हास्य कलाकार विजयशंकर मौर्य ने अपने हास्य व्यंग से लोगों को लोट पोट कर दिया।