कोरोना काल में आय घटी है जबकि महंगाई बेहिसाब बढ़ी है। इससे रोज कमाने खाने वाले और मध्य वर्ग के लोग परेशान हैं। सब्जी, राशन व तेल की कीमतें आसमान ही छू रही हैं। ये बातें अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत शुक्रवार को हरबंशपुर स्थित पालीवाल गेस्ट हाउस में ‘कोरोना काल में घटी आमदनी, बढ़ा किचन का बोझ’ विषयक संवाद में महिलाओं ने कहीं। इस मौके पर 16 महिलाओं ने भागीदारी की।
संवाद में महंगाई को लेकर मुखर हुई महिलाओं और छात्राओं ने कहा कि कोरोना के इस संकट काल में सरकार को महंगाई पर अंकुश लगाना चाहिए ताकि लोग पौष्टिक आहार ले सकें। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अभया महिला सेवा संस्थान की सचिव अनामिका सिंह पालीवाल रहीं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में आमदनी घट गई है। बढ़ती महंगाई, जिम्मेदारियों और बढ़ते खर्चों के बीच बचत कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है। हमें अपने किचन को संभालना भारी पड़ने लगा है। व्यक्ति की आमदनी इतनी तेजी से नहीं बढ़ती, जितनी तेजी से महंगाई बढ़ रही है। पहले जहां गैस सिलिंडर की कीमत चार सौ रुपये थी, आज वहीं गैस नौ सौ रुपये तक पहुंच गया है। सब्जी, राशन व तेल के दाम तो आसमान ही छू रहे हैं। ऐसे में रोज कमाने खाने वाला परिवार बेहद संकट के दौर से गुजर रहा है। इस महंगाई के दौर में राशन से लेकर हरी सब्जियां महंगी हो गई हैं। जहां किचन की टोकरी में सब्जियां भरी पड़ी रहती थी वहीं आज टोकरियां खाली पड़ी हैं।
बोली महिलाएं
गैस सिलिंडर की कीमत 400 रुपये से बढ़कर 900 से अधिक हो गई है। खाद्य सामग्री भी महंगी हुई है। ऐसे में रोज कमाने खाने वाला परिवार घर का खर्च कैसे चलाएगा। यह एक बड़ा प्रश्न बना हुआ है।-रितू मौर्य, गृहणी।
कोरोना काल में सभी कामधाम बंद चल रहे हैं और खर्च अधिक हो गए हैं। ऐसे में कम आमदनी में घर चलाना मुश्किल हो गया है। इस समय कोई बीमार हो जाए तो स्थिति और भी खराब हो जाएगी।-पुष्पा राय, गृहणी।
इस कोरोना काल में काम बंद चल रहे हैं वहीं महंगाई अपने चरम पर है। घर के राशन से लेकर बाहर के सामान भी महंगे हो गए हैं। वहीं इस कोरोना काल में दवाएं भी महंगी हो गई है। ऐसे में आम आदमी को घर का खर्च चलाना बेहद मुश्किल भरा होगा।-सांभवी, छात्रा।
कोरोना काल में सब्जी व्यापारी से लेकर दवा के कारोबारी तक सभी मुनाफा कमा रहे हैं। दवाएं भी महंगी पड़ रही हैं। शासन को इसपर विचार करने की जरूरत है।-प्रगति, छात्रा।
कोरोना काल लोगों के लिए आफत बनकर आया है। अस्पतालों में तीमारदारों से अधिक वसूली की जा रही है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों का ठीक उसे उपचार नहीं हो पा रहा है।-अरुणिमा सिंह, गृहणी।
इम्युनिटी मजबूत करने के लिए लोग किवी का फल खरीद रहे हैं। फल विक्रेता इसका फायदा उठाकर पूर्व में 300 रुपये किलो बिकने वाला किवी अब 100 रुपये में एक बेच रहे हैं।-सोनी अग्रवाल, गृहणी।
महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। किचन का जायका बिगाड़कर रख दिया है। पहले जहां बोरे में भरकर सब्जियां आती थीं वहीं अब थोड़ी-थोड़ी सब्जियां लेनी पड़ रही है।-बीना गुप्ता, शिक्षक।
कोरोना कर्फ्यू के कारण काम बंद चल रहा है। ऐसे में किसी तरह से घर का खर्च चल रहा है। ऐसा ही रहा तो बहुत जल्द मध्यम वर्ग के लोगों का परिवार भुखमरी का शिकार हो जाएगा।-अनुराधा, गृहणी।
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राशन तो महंगे हो रही रहे हैं। सरसों के तेल का दाम आसमान छू रहा है। पिछले छह माह के दामों पर नजर डाले तो दो गुना रेट में बढ़ोत्तरी हुई है।-अनुपमा, गृहणी।
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कोरोना काल में लोग मंदी से जूझ रहे हैं वहीं अस्पताल संचालक दोहन कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही है। कही सुविधाएं हैं भी तो चिकित्सक स्टाफ लापरवाह है। इस परिस्थिति से हम गुजर चुके हैं।-अनामिका सिंह पालीवाल, सचिव, अभया महिला सेवा संस्थान।
सब्जियां मंडियों में सस्ती मिल रही हैं लेकिन ठेले पर बेच रहे विक्रेता सब्जियों को दोगुना रेट से बेच रहे हैं। ऐसे में किचन का बजट बिगड़ रहा है।-कुसुम मिश्रा, गृहणी।
शासन को महंगाई पर लगाम लगाने की जरूरत है। कारण कि इस कोरोना के संक्रमण काल में कामधाम बंद चल रहे हैं। सभी गृहप्रयोगी सामान भी महंगे हो गए हैं। ऐसे में मध्यम वर्ग का परिवार बेहद परेशान है।-अंशिका मौर्य, गृहणी।
पिछले एक माह से कोरोना कर्फ्यू के कारण सभी काम बंद चल रहे हैं। आमदनी ना के बराबर है। घर के खर्च अधिक हो गए हैं। इस महंगाई के दौर में बड़ी मुश्किलें हो रही हैं।-शहनाज बानो, गृहणी।
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घर की कमाई घट गई और खर्च बढ़ गए हैं। ऐसे में महंगाई आसमान छू रही है। इस कोरोना कर्फ्यू में सबसे अधिक परेशान रोज कमाने और रोज खाने वाले परेशान है।-प्रतिमा सिंह, छात्रा।
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गैस सिलिंडर का दाम दो गुना हो गया है। सब्सिडी न के बराबर मिल रही है। रिक्शा चलाने वाले का परिवार इतने पैसे एक साथ कैसे लाएगा कि गैस सिलिंडर भी भरा जा सके और घर का खर्च भी चल जाए। सरकार को इसपर विचार करने की जरूरत है।-सीमा अग्रवाल।