जिला अस्पताल में एक्सपायरी दवाओं को शवगृह के पीछे चार दिनों के अंदर दूसरी बार भारी मात्रा में जीवन रक्षक दवाएं फेंकी हुई मिली हैं। शनिवार को फेंकी मिली दवाओं की अभी जांच शुरू भी नहीं हुई है कि पुन: भारी मात्रा में दवा मिलने से महकमे में हड़कंप मच गया है। बीते शनिवार को जिला अस्पताल परिसर स्थित शवगृह के पीछे भारी मात्रा में एक्सपायरी व अगस्त माह में एक्सपायर होने वाली दवाएं फेकी हुई मिली थीं। मंगलवार को एसआईसी डॉ. रीता दुबे ने तीन डॉक्टरों की टीम जांच के लिए गठित की थी। इसके साथ ही चार फार्मासिस्टों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण भी तलब किया था। फेंकी मिली दवाओं को जांच के लिए स्टोर भेजा था। वहीं मंगलवार की रात फिर उसी स्थान पर भारी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं फेंक दी गई। सीएमओ डॉ. आईएन तिवारी पूर्व की अपनी बात को दोहरा रहे हैं कि दवा अस्पताल परिसर में फेकी मिली है और एसआईसी को जांच के लिए कहा दिया गया है। यदि पुन: मिली है तो उसकी जांच भी कराना एसआईसी की ही जिम्मेदारी है। जबकि मौके से चंद कदम की दूरी पर ही सीएमओ के अंडर में आने वाला एसएमडी स्टोर है। जहां से सीएचसी-पीएचसी को दवाएं जाती है। इस पर सीएमओ ने कहा कि अब सीएचसी-पीएचसी को दवाएं छतवारा में स्थापित वेयरहाउस से सीधे उपलब्ध कराई जाती हैं। एसएमडी स्टोर में अब दवाएं शासन से नहीं आती हैं।
फिर आखिर शासन से मरीजों को नि:शुल्क वितरण के लिए आने दवाएं आखिर क्यों एक्सपायर कर इधर उधर फेंक कर निस्तारित की जा रही हैं, यह जांच का विषय है। कायदे से तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी जांच करा कर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।
जिला अस्पताल की प्रभारी एसआईसी डॉ. रीता दुबे ने बताया कि जितनी भारी मात्रा में एक्सपायर दवाएं फेंकी मिली है, उतनी मात्रा में दवाएं अस्पताल को शासन से नहीं आती हैं। एक्सपायर दवाओं का फेंका मिलना संदिग्ध होता जा रहा है। स्टाॅक की जांच कराई जा रही है। जांच टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने पर जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह भी संभव है कि फेंकी दवा सीएचसी-पीएचसी को भेजी जाने वाली दवाएं हों।