मंडल में मनरेगा मजदूरों के ई-केवाइसी की प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। अभी तक मंडल में मऊ 55.51 फीसदी के साथ शीर्ष पर है तो वहीं बलिया में 26.91 फीसदी ही ई-केवाइसी हो पाई है। वहीं आजमगढ़ में 36.85 फीसदी कार्य पूरा हो पाया है।
कार्यस्थल पर एनएमएमएस एप के जरिए एक-एक श्रमिकों की ऑनलाइन हाजिरी लगाई जा रही है। ताकि वास्तविक सक्रिय श्रमिकों की पहचान की जा सके।
ई-केवाईसी के दौरान मनरेगा श्रमिकों का आधार आधारित फेस प्रमाणीकरण होगा। इसके अलावा इस प्रक्रिया में केवल फोटो ही नहीं बल्कि, श्रमिक को कैमरे के सामने पलक झपकाने, हाथ हिलाने आदि जैसी गतिविधि भी करनी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि व्यक्ति जीवित है।
सत्यापन उसी स्थान पर होगा, जहां मजदूर काम कर रहा होगा। प्रमाणीकरण के बाद मजदूर के जीवित होने का प्रमाण पत्र खुद वेबसाइट पर अपलोड हो जाएगा।
फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
ऐसे मामले संज्ञान में आते हैं कि पंजीकृत श्रमिकों की जगह दूसरे श्रमिकों से काम लिया जाता है। लिहाजा पात्र श्रमिकों को साल में 100 काम नहीं मिल पाता है। इसी को ध्यान में रखकर शासन की ओर से नई ई-केवाईसी प्रणाली के लागू की गई है। इस नई व्यवस्था के बाद फर्जीवाड़ा रोकने में मदद मिलेगी। कार्यस्थल पर ही मजदूर के चेहरे का प्रमाणीकरण होगा। सही श्रमिक नहीं है तो फेस प्रमाणीकरण फेल हो जाएगा। इससे न तो उसकी उपस्थिति लग सकेगी और न ही कार्य दिवस का भुगतान संभव होगा।
जिला - सक्रिय श्रमिक - हुई ई-केवाइसी
आजमगढ़ - 3,06,096 - 1,12,763
मऊ - 1,64,550 - 91,333
बलिया - 1,83,309 - 49,216
सक्रिय मनरेगा जॉब कार्डधारकों के लिए ई-केवाईसी करानी जरूरी है। इसके लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से विकसित एनएमएमएस और आधार फेस प्रमाणीकरण एप का उपयोग किया जा रहा है। 31 दिसंबर तक इसे पूरा कर लिया जाएगा।
-राम उदरेज, डीसी मनरेगा।