आजमगढ़ के अतरौलिया में एक किशोरी जो अभी समाज में अच्छे-बुरे का मतलब भी नहीं समझती, पलभर में ही उसके सिर से ममता की छांव छिन गई। बेरहम इस कोरोना ने एक बेटी को अनाथ बना दिया। मां की अर्थी उठाने के लिए जब अपने आगे नहीं आए तो मदद के लिए कई हाथ आगे बढ़े। दो चिकित्सकों ने समाजसेवियों के साथ मिलकर किसी तरह शव को राजघाट पर मंगवाया। इसके बाद बेटी ने अपनी मां को मुखाग्नि दी।
जानकारी मुताबिक दिल्ली की रहने वाली एक महिला अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ महराजगंज में किराए के मकान में रहती थीं। दो वर्ष पूर्व उनके पति की भी मौत हो चुकी थी। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में महिला कोरोना संक्रमित हो गई। किसी तरह से उसकी बेटी ने अपनी मां को छह मई को अतरौलिया के 100 शैया संयुक्त जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया था। उपचार के दौरान शनिवार की सुबह उसकी मौत हो गई।
इसकी जानकारी दिल्ली में रह रहे परिजनों को जी गई लेकिन कोविड पॉजिटिव होने के कारण कोई आगे नहीं आया। यह सब कुछ देख अतरौलिया के चिकित्सा प्रभारी डॉ. अली हसन व डॉ. केके झा ने समाजसेवी विनीत सिंह रिशु के साथ मिलकर 14 वर्षीय लड़की की मदद की और उसे हिम्मत बंधाया। विनीत सिंह रीशू, श्रीकृष्णा, पवन सिंह, सैयद एहतेशाम, मो. अमीर, मो. सैफ ने किसी तरह से शव को राजघाट पर मंगवाया और बेटी ने अपनी मां को मुखाग्नि दी। मानवीय संवदेना की मिसाल बन चुके विनीत सिंह रीशू व उनके साथियों की लोग सराहना कर रहे हैं।