स्वच्छ भारत मिशन के फेज-1 में सभी ग्राम पंचायतों में शौचालयों के साथ सामुदायिक शौचालयों का निर्माण करा दिया गया और अब फेज-2 में ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 78 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों को पूरी तरह ठोस व तरह अपशिष्ट मुक्त बनाया जाएगा। शासन की ओर से 21 करोड़ रुपए जारी किए गए। वहीं, स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए प्रधान, सचिव व पंचायत सहायकों को मुख्यालय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
डीपीआरओ अजय श्रीवास्तव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य कराए जाने के लिए पांच हजार से अधिक आबादी वाले ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता पर संतृप्त किए जाने का निर्णय लिया गया है। बताया कि ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन पर 660 रुपये प्रति व्यक्ति और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर 45 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से बजट खर्च किया जाएगा। वहीं जो सबसे छोटे गांव चयन किए गए है, जहां ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर 280 प्रति व्यक्ति और तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर 60 प्रति व्यक्ति के हिसाब से खर्च किया जाएगा। इसमें 30 फीसदी बजट ग्राम पंचायतों से खर्च किया जाएगा। कार्य योजना को स्वीकृति मिलने के बाद जिले के 58 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है। जिसमें शामिल कुल 78 गांवों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत कार्य शुरु हो गए है।
गांव में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र बनेगा
गांवों से निकलने वाले कचरे के लिए गांवों में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र की स्थापना की जाएगी। गांवों में घर-घर से कचरा एकत्र किया जाएगा। उसके बाद अवशिष्ट केंद्र पर अलग-अलग किया जाएगा।
ब्लाक स्तर पर होगा प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन
डीपीआरो अजय श्रीवास्तव ने बताया कि प्लास्टिक कचरे को गांवों से घर-घर से एकत्र किया जाएगा। उसके बाद उसका भंडारण, ढुलाई और पुर्नचक्रण योग्य भाग को पंजीकृत एजेंसी तक भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। गांवों स्तर पर भंडारण की सुविधा एवं विकासखंड स्तर पर प्लास्टिक कचरा के प्रबंधन की इकाई की स्थापना कराई जाएगी। प्लास्टिक यूनिट 16 लाख की लागत से तैयार की जाएगी। डीपीआरओ ने बताया कि गोबर धन योजना के अन्तर्गत पशुओं के गोबर के प्रबंधन के लिए यूनिट की स्थापना कराई जाएगी, जिससे ग्रामीणों को लाभ मिल सकेगा।