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Azamgarh News: महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना से बुनकरों के लौटेंगे सुनहरे दिन

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अमिलो। बुनकरों के विकास के लिए केंद्र सरकार ने बजट में महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना का प्राविधान किया है। इसमें कपड़ा व हैंडलूम को बढ़ावा दिए जाने की बात को सुनकर जिले के करीब ढाई लाख बुनकरों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है। वर्षों से उपेक्षा झेल रहे बुनकरों को अब एक बार फिर उम्मीद जगी है कि उनके सुनहरे दिन लौट सकते हैं। रेशमी साड़ी के लिए देश-विदेश में पहचान रखने वाला मुबारकपुर क्षेत्र आज अपने पुराने वैभव को याद कर आंसू बहा रहा है। यहां के बुनकरों के तैयार कपड़े देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी गुणवत्ता और मजबूती के लिए मशहूर थे, लेकिन समय के साथ-साथ सरकारों की उदासीनता और कच्चे माल की लगातार बढ़ती कीमतों ने इस उद्योग को गहरा झटका दिया।
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नई योजना जब भी कोई शुरू होती है तो बुनकर को योजना से नई आशा की किरन फूटती है। आज ठीक सरकार ने बजट में बुनकरों को महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना का प्रस्ताव रखा है। अभी इसके बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी। -मोहम्मद मोबीन, मोहल्ला कटरा मुबारकपुर।

योजना जब धरातल पर उतरे और इसका क्रियान्वयन ठीक ढंग से हो। आम बुनकर को योजना से जोड़ा जाए, ताकि जिले के ढाई लाख बुनकरों का भला हो सके। -इफ्तेखार अहमद उर्फ मुनीम, मोहल्ला पुरा रानी, मुबारकपुर।
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मुबारकपुर में बुनी जाने वाली रेशमी साड़ी की पहचान कोई ब्रांडिंग नहीं है। सरकार ने ओडीओपी योजना में शामिल किया परंतु बुनकरों के हालात में कोई बदलाव नहीं आया। इस बजट में वैश्विक बाजार और ब्रांडिंग बढ़ावा पर मुख्य रूप से फोकस किया गया है। गुफरान अहमद, मोहल्ला पुरा दुल्हन, मुबारकपुर।
इस योजना से बुनकरों काे वह पुराना दिन देखने को मिल सकता है, जब मुबारकपुर की मंडी में रेशमी साड़ी के खरीदार बाहर से आकर बुनकर मजदूर से साड़ी खरीद कर उन्हें असली मूल्य भुगतान कर दिया करते थे। -वकारूल गनी, मोहल्ला पुरा रानी, मुबारकपुर।
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