मदरसा फैज़ुलओलूम सरायमीर के प्रांगण में गुरुवार की रात राष्ट्रीय एकता सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें सभी धर्मों के ज्ञानी और धर्मगुरुओं ने भाग लिया।
अपने संबोधन में वक्ताओं ने देश में फैल रहे आपसी वैमनस्यता पर अपने विचार रखे। जमीअत-उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश में सांप्रदायिक ताकतें सांप्रदायिकता का जहर घोल कर माहौल को बिगाड़ रही हैं।
जिससे देश की एकता और अखंडता को खतरा पैदा हो गया हेै। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक और अल्पसंख्यकों का सब कुछ एक है। अगर देश में सांप्रदायिकता परवान चढ़ी तो स्थिति भयावह हो जाएगी।
वाराणसी गिरजाघर के बैनजान विशप ने कहा कि भारत एक महान देश है, इसकी महानता का पता इस बात से चलता है कि यहां पर सभी धर्मों को सम्मान और पूरा हक हासिल है।
उप्र संस्कृत माध्यमिक महाविद्यालय वाराणसी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश चंद तिवारी ने कहा कि आज शासन करने वाले अपनी कुर्सी की लालच में जाति, बिरादरी और समुदायों में लोगों को बांटकर रूपया कमा रहें हैं
और विदेशी बैंकों में जमा कर रहे हैं। पहले अंग्रेज हमें बांटकर देश पर काबिज रहे अब राजनीतिक लोग उसी का अनुसरण कर हमें लड़ाकर राज कर रहे हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के महंत डा. कुलपति तिवारी ने कहा कि देश के सभी समुदाय के लोग एक माले के रूप में हैं, अगर माले का एक भी मोती टूट जाय तो उसका स्वरूप बिगड़ जाता है।
उसी प्रकार देश की एकता और अखंडता पर खतरा हुआ तो देश बरर्बाद हो जाएगा। ग्रन्थ गुरूद्वारा समिति वाराणसी के भाई धर्मवीर सिंह ने कहा कि आज देश की जो स्थिति है
ऐसे में इस तरह के आयोजन कर जनता को जागृत करना सराहनीय कार्य हैं। सम्मेलन का शुभारंभ गुरुवार की देर रात तेलावते कुरआन पाक से हुआ। सम्मेलन का समापन दुआख्वानी के साथ हुआ।
अध्यक्षता मौलाना हबीबुर्रहमान नोमानी देवबंद और संचालन मौलाना मुफ्ती अशफाक अहमद ने किया।