गोविंद साहब मेले में सोमवार को दूसरे दिन भी आस्थावानों का रेला लगा रहा। श्रद्घालुओं ने पोखरे में डुबकी लगाई और महात्मा गोविंद साहब की समाधि पर मत्था टेका। गलन भरी ठंड भी श्रद्धालुओं की आस्था को नहीं डिगा सकी। ।
गोविंद दशमी से एक दिन पहले रविवार से ही भक्तों की भीड़ लगने लगी थी। सोमवार को धाम में खिचड़ी चढ़ाई गई। मेले के दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा। गन्ना, खजला, लकड़ी निर्मित वस्तुएं बच्चों के खिलौने एवं दुधारू पशुओं व घोड़ों तथा मौसमी पेड़-पौधों की जमकर लोग खरीदारी किए। दूरदराज से आने वाले श्रद्धालु रात बिताने के लिए मनोरंजन का सहारा लेते हैं। अगले दिन सरोवर में स्नानोपरांत महात्मा की समाधि पर पूजन अर्चन के बाद मेले से अपने दैनिक उपयोग की खरीदारी कर लौटते हैं। मेले में इस बार मनोरंजन की अनुमति नही दी गई थी। वैरायटी शो थिएटर, झूला, जादू एवं सर्कस की व्यवस्था नहीं थी। मेले में सफाई तक नहीं कराई गई थी। कहीं अलाव नहीं जला था, जिससे श्रद्धालुओं को रात में परेशानी हुई। व्यवसायियों ने मेले की अनवरत सफाई और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस की सक्रियता के बावजूद पाकेटमारी की घटना की घटनाओं पर रोक नहीं लग पाईआ। मेला कोतवाली प्रभारी चंद्रभान सिंह यादव ने बताया कि मेला ड्यूटी के लिए भेजे गए पर्याप्त पुलिस बल की आमद अभी तक नहीं हो पाई है।