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Azam Khan: आजमगढ़ में आजम खां का छलका दर्द, बोले- केस ही दर्ज कराना था तो ताजमहल या कुतुबमीनार की चोरी का कराते

Sat, 18 Jun 2022 06:06 PM IST
उत्पल कांत संवाद न्यूज एजेंसी, आजमगढ़

सार

आजमगढ़ में सपा प्रत्याशी धर्मेन्द्र यादव के समर्थन में आजम खां ने लोगों से वोट देने की अपील की। जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार पर हमला बोला। 
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आजमगढ़: मुबारकपुर में जनसभा को संबोधित करते आजम खान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के आजमगढ़ में लोकसभा उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। पार्टियों के दिग्गज नेताओं ने जनपद में डेरा डाल दिया है। इसी क्रम में शनिवार को सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां का आजमगढ़ आगमन हुआ। इस दौरान उन्होंने नसीरपुर और मुबारकपुर में जनसभा को संबोधित किया।

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सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव के समर्थन में जनता से वोट के लिए अपील की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और यूपी सरकार के नीतियों पर जमकर बरसे। आजम खां ने कहा कि मुल्क, सूबे और आपकी बेहतरी के लिए हमने और हमारे अपनों ने क्या-क्या नहीं सहा। मेरे खिलाफ सैकड़ों मुकदमे दर्ज हैं। किताबें, फर्नीचर और मुर्गी चोरी ही नहीं, डकैती की धाराएं भी हमारे ऊपर लगाई गई हैं।

हमारे मुखालिफों ने हमारा मयार बहुत हल्का रखा। उन्हें अगर मुकदमा कराना ही था, तो कुतुबमीनार और ताजमहल की चोरी का मुकदमा दर्ज कराते। लोकसभा उपचुनाव में सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव के समर्थन में आयोजित जनसभा में विधायक आजम खां ने अपना दर्द बयां किया।

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आजमगढ़ में आजम खां आठ साल बाद किसी राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे। इस मौके पर सपा के राष्ट्रीय महासचिव बलराम यादव, विधायक आलमबदी, विधायक नफीस अहमद, जिलाध्यक्ष हवलदार यादव, त्रिभुवन दत्त, पूर्व एमएलसी राकेश यादव उर्फ गुड्डू, विधायक अखिलेश यादव आदि मौजूद रहे। 

जेल में बिताए पलों का किया जिक्र
उन्होंने कहा कि मैं 27 महीने की तनहाई काटकर आया हूं वह इसलिए कि हुक्मरानों पर कत्ल का इल्जाम न आए और हम मर जाएं। हमें सीतापुर की ऐसी जेल में रखा गया जहां लोग खुदकुशी करते हैं। लेकिन मैं कल भी जिंदा था, आज भी हूं और कल भी रहूंगा। जेल में मुझे एक कमरे में बंद रखा गया। दरवाजे पर पांच लोगों को पहरे पर बिठाया गया था।

संगीन दौर से गुजर रहा मुल्क

लोकसभा उपचुनाव के लिए सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव के पक्ष में समर्थन जुटाने पहुंचे सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां ने ‘अग्निपथ’ को लेकर कहा कि बिहार की आग यूपी में भी आ गई है। पूरा मुल्क संगीन दौर से गुजर रहा है। उन्होंने नसीरपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए अपना दर्द भी बयां किया।

उन्होंने कहा कि इंसानों के बीच नफरत पैदा की जा रही है। लोग एक-दूसरों के मोहल्लों में रहने से डरने लगे हैं। अग्नि पर लोग चल रहे हैं। हिंदुस्तान ने बहुत बुरे दिन देखे हैं। पहले भी लोगों के साथ छल हुआ, अब भी छले जा रहे हैं। इस आग में किस-किसको निशाना बनाया जाएगा, इससे होशियार रहने की जरूरत है।

जेल में बिताए पल पर उन्होंने कहा कि जो जुल्म मेरे साथ हुआ, उसे याद रखा जाएगा। हम 27 महीने तक जेल में रहे। हमको एड़ियां रगड़ने को मजबूर किया गया, पर हमने ऐसा नहीं किया। मैं यहां अपनी तकलीफ का जिक्र करने नहीं आया हूं। आपसे कहने आया हूं कि ‘लम्हों ने खता की थी, सदियों ने सजा पाई’ इस चुनाव से हुकूमत नहीं बदलेगी, लेकिन मुल्क को एहसास हो जाएगा कि हम किस तरह विश्व गुरु बनेंगे।

सपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती, परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर

धर्मेंद्र यादव के साथ सपा नेता रामगोपाल यादव - फोटो : अमर उजाला
बदली सियासी परिस्थितियों में आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र का उपचुनाव रोचक हो गया है। आजमगढ़ में सैफई परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है। शीर्ष नेतृत्व को आजमगढ़ में प्रत्याशी तय करने में वक्त जरूर लगा, लेकिन इसके पीछे कई वजहें रहीं। हालांकि तमाम चर्चाओं के बाद यहां से पूर्व धर्मेंद्र यादव का नाम तय किया गया। सपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती है।

आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में करीब 18.38 लाख मतदाता हैं। इनमें करीब साढ़े तीन लाख यादवों समेत ओबीसी के कुल मतदाताओं की संख्या साढे़ छह लाख से अधिक है। साढ़े चार लाख दलित, साढ़े तीन लाख मुस्लिम और तीन लाख सवर्ण मतदाता हैं। आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़ सदर और मेहनगर विधान सभा क्षेत्र हैं। इन सभी सीटों पर सपा के विधायक हैं। विधानसभा चुनाव 2022 में इन पांचों सीटों पर सपा को 4.35 लाख, भाजपा को 3.30 लाख और बसपा को 2.24 लाख मत मिले थे। 
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वर्ष 2019 में सपा-बसपा का गठबंधन था, जिसमें अखिलेश यादव को 6.21 लाख और भाजपा के दिनेश लाल यादव को 3.61 लाख और सुभासपा को 10 हजार से अधिक वोट मिले थे। स्थिति साफ है कि 2019 में यादव, मुस्लिम के साथ दलित वोट भी सपा के साथ था। इस बार बसपा ने शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को मैदान में उतार कर मुस्लिम-दलित गठजोड़ पर दांव खेला है।

ऐसे में सपा के सामने मुस्लिम और यादव वोट बैंक को अपने पाले में बनाए रखने और दलितों को जोड़ने की चुनौती है। यही वजह है कि सपा ने पहले दलित उम्मीदवार के रूप में सुशील आनंद को उतारने की तैयारी की थी, लेकिन उनका नाम दो विधान सभा क्षेत्र में होने से पर्चा खारिज होने की आशंका थी।
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