वस्त्र मेले का अवलोकन करते डीआईजी।
नगर के सिधारी स्थित राहुल प्रेक्षागृह में हरिहरपुर कजरी महोत्सव और प्रदर्शनी का शनिवार की देर शाम शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप एजुकेशनल ट्रस्ट के प्रबंधक और अशोक श्रीवास्तव द्वारा दीप प्रज्जवलन कर और मां शारदा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर किया गया।
एक तरफ जहां पुरानी विधाएं धीरे-धीरे विलुप्त होने की ओर हैं वहीं हरिहरपुर घराना अपना पारंपरिक विधा कजरी को बचाने के प्रयास में जुटा हुआ है। जिसके क्रम में हरिहर घराने की ओर से प्रतिवर्ष कजरी महोत्सव का आयोजन किया जाता है। जिसमें कई जनपदों और प्रांतों के कलाकार भाग लेते हैं। इसी क्रम में शनिवार को दो दिवसीय हरिहरपुर कजरी महोत्सव और प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। इस दौरान लोगों ने जहां कजरी की मधुर तान सुनी वहीं हरिऔध कला परिसर में लगे मुबारकपुर के साड़ियों और निजामाबाद के ब्लैक पाटरी के बर्तनों को देखा।
कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चों ने नृत्य के साथ गणेश वंदना प्रस्तुत कर किया। इसके बाद तन्वी सिंह ने कजरी -घेरी-घेरी आवे कारी रे बदरिया ना प्रस्तुत किया।
इसके बाद अमित संगीत महाविद्यालय के बच्चों ने समूह कजरी गीत और एकल कजरी गीत की प्रस्तुति की। तत्पश्चात आयुष मिश्र, मिशन मिश्र और आदर्श मिश्र ने कजरी सावन झरी लागे रहे धीरे-धीरे - सुनाकर लोगों को झूमने के लिए विवश कर दिया। इसके बाद गायक राजेश रंजन ने बलमा सावन में घर आजा, सावनी बदरिया छाई हो रामा और कजरी सब केहू गावेला सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। फिर बिहार के छपरा से आए मेहमान कलाकार पंडित रामप्रकाश मिश्र ने मेघ मल्हार, ठुमरी और छपरा की मशहूर छपरईया सुनाकर सभी को झूमने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम के दौरान रह रह तक तालियां गूंजती रही। अंत में पंडित सुदर्शन मिश्र ने कजरी की तान से सभी की वाहवाही लूटी। इस मौके पर संस्था सचिव अजय मिश्र, अध्यक्ष राजेश मिश्र, उदय मिश्र आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन वैैैभव वर्मा ने किया। इस दौरान बड़ी तादाद में श्रोता गण उपस्थित रहे।