आजमगढ़। विशेष न्यायाधीश पास्को रामेंद्र कुमार की अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म के जुर्म में चार अभियुक्तों को दोषी पाते हुए मंगलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को अलग-अलग धाराओं में कुल एक लाख पांच हजार का दंड लगाया।
घटना फूलपुर थाना क्षेत्र की है। इस मामले में एक किशोरी (इंटर की छात्रा) को वर्ष 2013 में 17 मार्च को गाड़ी में जबरन बैठाकर ले जाकर उसके साथ जबरन सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस मामले में पीड़िता की मां ने फूलपुर थाना में आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें उसने पुलिस को बताया था कि उसकी लड़की अपने पड़ोसी के ट्यूवेल के पास मौजूद थी, तभी सरायमीर कस्बा की तरफ से बिना नंबर की सफेद पिकअप गाड़ी आई जिस पर सवार अज्ञात लोगों ने उसे जबरन गाड़ी में बैठकर ले गए। बाद में आरोपितों ने उसे जौनपुर जिले के शाहगंज के समीप छोड़ दिया। दो लोग पीड़िता को उसके घर पहुंचाए। घटना के संबंध ने पीड़िता की मां ने पूछा तो किशोरी ने अपने साथ हुए घटना के संबंध में दुष्कर्मियों के बारे में बताया। विवेचना के दौरान फूलपुर थाना पुलिस ने निजामाबाद थाना के फरिहा निवासी शकील पुत्र किल्लू, सड्डू उर्फ शादाब पुत्र सुल्तान, जिला जौनपुर, थाना-सरपतहा के मटीयारा निवासी सिराज पुत्र जानमोहम्मद, गंभीरपुर थाना के छाऊं गांव निवासी कठाऊ उर्फ शाहआलम पुत्र मोहम्मद युनूस के विरुद्ध दुष्कर्म व पास्को एक्ट के तहत भी अरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार ये पास्को एक्ट का जिले में पहला मामला था।
मुकदमे के परीक्षण के दौरान अदालत ने संयुक्त आयुक्त अभियोजन वीपी वर्मा के निर्देशन में अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक अवधेश कुमार मिश्रा ने इस मुकदमे की वादी, पीड़िता, प्रदीप मौर्य, कांस्टेबुल सुमन यादव, कास्टेबुल गुप्तेश्वर राय, इंस्पेक्टर आशीष कुमार मिश्रा, डा. लालमणि, राजेश चंद को बतौर साक्षी पेश किया और अपने तर्को को रखा। अदालत ने उभय पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद आरोपियों को पास्को एक्ट को छोड़कर, चारों आरोपियों को धारा-376 डी में उम्रकैद के साथ 50-50 हजार रुपये जुर्माना, धारा 363 में सात वर्ष की कैद, 10 हजार रुपया जुर्माना, 366 में 10 वर्ष की कैद, 20-20 हजार रुपया जुर्माना, 392 में 10-10 वर्ष की कैद और 20-20 हजार रुपये का जुर्माना, धारा- 411 में तीन वर्ष की कैद के साथ पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड की धनराशि को जमा न करने पर अभियुक्तों को छह माह की कैद अलग से भुगतना होगा। बतादें कि जिले में पास्को एक्ट लागू होने के बाद यह पहला ऐसा मुकदमा न्यायालय में था।