पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद पीड़िता को एक हफ्ते बाद बरामद कर लिया। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपी दिलशाद के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत की। अभियोजन पक्ष की तरफ से पीड़िता समेत कुल सात गवाहों के न्यायालय में बयान हुए। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी दिलशाद को आजीवन कारावास तथा तीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इस मामले में बेहतर विवेचना के लिए एसपी अनुराग आर्य ने तत्कालीन विवेचक निरीक्षक जगदीश उपाध्याय को 2000 व पैरोकार मनीष कुमार को 1000 का नकद इनाम व प्रशस्तिपत्र देने की घोषणा की है।