सिर्फ मां और पिताजी आते हैं लेकिन दूर से ही हमसे बात करते हैं। पत्तल में उनके द्वारा भोजन दिया जाता है और प्लास्टिक की गिलास में पानी। जिसे खाने के बाद वह फेंक देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मेरी वजह से मेरे गांव या मेरे परिवार को कोई बिमारी होती है तो यह ठीक नहीं है। इसलिए लोगों की सलाह पर मैंने खुद गांव से बाहर रहने का निर्णय लिया।