नगरपालिका परिसर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सोमवार को अर्द्धवार्षिक साहित्यिक पत्रिका ‘सप्तपर्णी’ के द्वितीय अंक का विमोचन करते हुए मुख्य अतिथि कवि प्रो. प्रभुनाथ सिंह मयंक ने कहा कि हिंदी पत्रिकाओं के गौरवशीर्ष पर ‘सप्तपर्णी’ पत्रिका विचारवान, शोधपरक, प्रयोगों एवं मूल्यों को प्रेरक प्रतिनिधित्व देने वाली मुकुटमणि बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस पत्रिका ने समीक्षा, नवगीत, गजल, संस्मरण, साहित्येतिहास, ललित निबंध आदि विद्याओं के प्रयोगधर्मी, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, सांस्कृतिक, कलात्मक संदर्भों का ऐसा मानक प्रस्तुत किया है, जो शोधार्थियों, विद्वानों और सहृदयों के लिए मूल्यवान है।
दारुल मुसन्निफीन शिब्ली एकेडमी के मौलाना उमैरुसिद्दीक नदवी ने कहा कि यह पत्रिका आजमगढ़ के उन साहित्य, कला एवं संस्कृति प्रेमियों के लिए एक सुंदर भेंट है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी साहित्य के द्वारा समाज में ज्ञान की रोशनी फैलाने का कार्य कर रहे हैं। यह हमारे लिए और भी महत्व की बात है कि इसमें अल्लामा शिब्ली नोमानी के जीवन और उनके कार्यों का उल्लेख है।
पारसनाथ ‘गोवर्धन’ ने कहा कि अर्चना सिंह द्वारा संपादित एवं बृजेश सिंह के संपादकीय सहयोग से सप्तपर्णी पत्रिका साहित्य कला एवं संस्कृति को समर्पित है। सप्तपर्णी ने जो विश्वास जगाया है, वह अपने आप में श्लाध्य है। कार्यक्रम को डा. शशिभूषण प्रशांत, लालसा लाल तरंग, डा. प्रेम बहादुर सिंह ‘मुनि’, रामप्रकाश शुक्ल ‘निर्मोही’, डा. वेद प्रकाश उपाध्याय, इलियास आजमी, शिव प्रसाद शर्मा ‘अंबु’, डा. रविंद्रनाथ राय आदि ने संबोधित किया।
संचालन बृजेश सिंह ने किया। मौके पर पत्रिका के सहायक संपादक डा. रामधीरज यादव, दीपक यादव, रीता यादव, संगीता सिंह, सपना बनर्जी, शंभू शरण सिंह, अभिषेक पंडित, सुरेंद्र सिंह मौजूद थे।