जनपद में काफी दिनों से एसटीपी निर्माण के लिए जमीन की तलाश हो रही है लेकिन अब तक जमीन नहीं मिली है। जमीन का पता नहीं है लेकिन जल निगम ने टेंडर जारी कर दिया है। जमीन को खरीद करने का कार्य नगरपालिका को करना है।
नगर पालिका क्षेत्र से प्रतिदिन हजारों लीटर सीवेज निकलता है। जिसे नगर पालिका द्वारा बिना ट्रीटमेंट के ही सीधे तमसा में बहाया जाता है। एनजीटी की टीम जब जनपद में आई थी तो उसने तत्काल नालों की टैपिंग करने और एसटीपी निर्माण कर गंदे पानी को ट्रीटमेंट के बाद भी नदी में छोड़ने का निर्देश नगरपालिका को दिया था। लेकिन एसटीपी के लिए जमीन न मिलने के कारण अब तक एसटीपी का निर्माण नहीं हो सका। काफी तलाश के पठखौली गांव में नवीन परती की 0.2 हेक्टेयर भूमि मिली थी लेकिन यह जमीन काफी कम थी। एसटीपी को बनाने के लिए कम से कम 0.2 हेक्टेयर जमीन की और जरूरत है। काफी दिनों से जमीन की तलाश की जा रही थी लेकिन जब जमीन नहीं मिली तो शासन को जमीन की खरीद किसानों से करने के लिए अनुमति मांगी थी। यह अनुमति मिल गई है लेकिन नगरपालिका को जमीन खरीद कर जल निगम को हैंडओवर करेगा। इसके बाद जल निगम इस जमीन पर एसटीपी का निर्माण करेगा। अभी तक नगरपालिका जमीन खरीद की कवायद भी शुरू नहीं कर सकी है और जल निगम की ओर से इसका टेंडर अपलोड कर दिया गया है। अधिशासी अभियंता एके शर्मा ने बताया कि एसटीपी के लिए जमीन खरीदने की मंजूरी मिल गई है। यह जमीन नगरपालिका को खरीदनी है जिसके लिए उसे पैसा दिया जा चुका है। जमीन खरीद होते ही एसटीपी का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। टेंडर अपलोड कर दिया गया है।