सरकारी अभिलेखों में मृतक से पुन: जीवित हुए लालबिहारी मृतक ने मंगलवार को पूर्व की घोषणा के अनुरूप पुनरविवाह किया। इसके साथ ही मृतक की पत्नी ने राष्ट्रपति को पत्रक भेज कर जीवित मृतक परिवार को 50 करोड़ रुपये मुआवजा दिए जाने की मांग की। मंगलवार को दोबारा विवाह समारोह मृतक के गांव अमिलो मुबारकपुर में आयोजित हुआ। इसमें जीवित मृतकों के साथ ही मृतक के नाती-पोता भी बढ़ चढ़कर शामिल हुए।
लालबिहारी का जन्म छह मई 1955 में हुआ था। 30 जुलाई 1976 को उसे सरकारी अभिलेखों में मृत दिखा दिया गया था। इसके बाद ही लालबिहारी ने अपने नाम के साथ मृतक टाइटिल लगा लिया तो वहीं मृतक संघ नाम से संगठन बनाकर खुद के साथ ही अन्य जीवित मृतकों की लड़ाई लड़ने लगा। लंबी लड़ाई के बाद लालबिहारी को 30 जून 1994 में सरकारी अभिलेखों में पुन: जीवित घोषित किया गया। इसके बाद लालबिहारी ने खुद को जीवित होते हुए भी मृत घोषित किए जाने के राजस्व विभाग के खेल पर लखनऊ हाईकोर्ट में हर्जा खर्चा के लिए 25 करोड़ के मानहानि का दावा किया। उसके दावे को 20 फरवरी 2023 को खारिज कर दिया गया। मंगलवार को लालबिहारी मृतक ने अपनी पत्नी करमी देवी के साथ ही पुनरविवाह किया। संविधान की शपथ लेते हुए एक दूसरे को माला पहनाकर मृतक व उसकी पत्नी ने अपना दूसरा विवाह संपन्न कराया। पुनरविवाह के बाद मृतक की पत्नी करमी देवी ने जीवित मृतक परिवार को 50 करोड़ का मुआवजा दिए जाने की महामहिम राष्ट्रपति से की और जानमाल रक्षा की गुहार भी लगाई।