जिले में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) न होने के कारण नगर से निकलने वाला लाखों लीटर गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के ही सीधे तमसा नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। इससे तमसा प्रदूषित हो रही है। जानकारों की मानें तो इसका जल प्रयोग योग्य नहीं रह गया है। वहीं इसे रोकने की बजाय जिम्मेदारों ने मौन साध रखा है। हालत यह है कि बहुत से लोगों ने अपने शौचालय का टैंक न बनवाकर पाइप को सीधे तमसा से जोड़ दिया है। जिम्मेदार भी ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर शांत बैठे हैैं।
शहर की जीवनदायिनी कही जाने वाली तमसा नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए भगीरथ प्रयास की जरूरत है। क्योंकि अतिक्रमण के कारण जहां नदी का दायरा सिमटता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इसके जल को प्रदूषित करने में लोग कसर नहीं छोड़ रहे।
आजमगढ़ नगरपालिका क्षेत्र से 22 नालों के जरिए लोगों के घरों से निकलने वाले गंदे पानी को बिना ट्रीटमेंट के ही सीधे तमसा में प्रवाहित किया जा रहा है। नगरपालिका क्षेत्र से रोजाना निकलने वाले 17 एमएलडी गंदे पानी से तमसा प्रदूषित हो रही है। इसके साथ ही कोट किला की तरफ बहुत से लोगों ने अपने शौचालय की पाइप को सीधे तमसा से जोड़ रखा है। इसे रोकने की बजाय जिम्मेदार लोग सब कुछ जानते हुए भी मौन साधे हुए हैं। इसका परिणाम यह है कि तमसा का पानी जो पहले आचमन योग्य हुआ करता था, अब उसमें लोग स्नान करना भी नहीं चाहतेे ।
तमसा को लेकर जिले में कई बार प्रयास शुरू हुए, लेकिन कोई योजना परवान नहीं चढ़ सकी। जिसका परिणाम है कि तमसा आज तक अविरल नहीं हो सकी। पूर्व में जिलाधिकारी रहे शिवाकांत द्विवेदी ने नदी की सफाई अभियान के दौरान तमसा को प्रदूषण से बचाने के लिए इसमें गिरने वाले नालों पर एसटीपी का निर्माण कराने का निर्देश पीडब्ल्यूडी और नगरपालिका को दिया था। लेकिन उनके जाने के बाद यह कार्य ठप पड़ गया। उन्हीं के निर्देश पर कोट किला में शौचालय की पाइप को सीधे तमसा से जोड़ने वालों को नोटिस भी जारी की गई थी, लेकिन उनके जाने के बाद उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एसटीपी न होने के कारण नालों के जरिए पानी को बिना ट्रीटमेंट के ही नदी में छोड़ा जा रहा था, लेकिन अब एसटीपी का निर्माण हो रहा है। जिसके पूरा होने पर सभी नालों को उससे जोड़ दिया जाएगा और पानी को ट्रीटमेंट के बाद ही नदी में छोड़ा जाएगा। - अनिल कुमार मिश्र, एडीएम प्रशासन व प्रशासक नगरपालिका।