मौनी अमावस्या के पर्व पर शुक्रवार को जिले में नदियों और पोखरों में सैकड़ों लोगों ने आस्था और श्रद्धा की डुबकी लगाई। दुर्वासा और दत्तात्रेय धाम सहित महाराजगंज स्थित भैरो बाबा धाम पर पर सुबह से ही लोग स्नान कर दान पुण्य करने पहुंच गए थे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने आस्था और विश्वास की डुबकी लगा कर परिवार की सुख-समृद्धि की।
अहरौला संवाददाता के अनुसार शुक्रवार को मौनी अमावस्या को दुर्वाषा धाम के पवित्र तमसा-मंजूषा के संगम तट पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने स्नान किया। स्नान के बाद मंदिरों में भोलेनाथ और ऋषि दुर्वाषा का जलाभिषेक किया। घाटों पर ब्राह्मणों, पुजारियों को द्रव्य व अन्न दान कर मनोकामना पूर्ति के लिए मनौती मानी। वहीं मंदिर में श्रद्धालुओं ने कड़ाही, चुनरी चढ़ा कर पूजन-अर्चना किया।
इस दौरान घंटा-घड़ियाल और लग रहे जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। दुर्वाषा मेला समिति के अध्यक्ष प्रेम गिरी ने बताया कि तमसा-मंजूषा के संगम में स्नान से पुण्य तो प्राप्त होता ही है मनौती भी पूरी होती है। मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने से भी कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। निजामाबाद संवाददाता के अनुसार दत्तात्रेय धाम पर श्रद्धालुओं ने तमसा और कुंवर नदी के संगम में डुबकी लगाई। बताते चलें कि निजामाबाद क्षेत्र से मात्र दो किलोमीटर दूर गौसपुर के नजदीक दत्तात्रेय धाम स्थित है। दत्तात्रेय ऋषि ने इस धाम को बनाया था।
मौनी आमवस्या पर लोगों ने दत्तात्रेय धाम पर पूजन-अर्चन किया। कटानी बाजार संवाददाता के अनुसार महाराजगंज स्थित भैरव बाबा धाम पर मौनी आमवस्या के दिन भोर से ही स्नान के लिए श्रद्धालु पहुंच गए थे। लोगों ने मंदिर के पास स्थित पवित्र पोखरे में स्नान किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंच भगवान भोलेनाथ को जलाभिषेक किया, पूजन-अर्चन कर मन्नत मांगी।
इस दौरान मंदिर के आस-पास सुरक्षा के कड़े प्रबंध थे। अतरौलिया संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के सिद्ध पीठ प्रथम देव धाम बहिरा देव में मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने आश्रम स्थित सरोवर कुंड में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। यहां भोर से ही श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा रहा।
इस दौरान बहिरा देव ओर मुसइ बाबा के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। महंत प्रेमदास ने बताया कि माघ मास में कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं इस पवित्र पर्व पर तीर्थ में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा पुण्य का उदय होता है।