वन गमन के दौरान जिस तमसा के तट पर भगवान श्रीराम ने प्रथम वास किया था, उसके अस्तित्व पर संकट पैदा हो गया है। शहर के दस बड़े नालों का गंदा पानी तमसा नदी में गिराया जा रहा है। नदी के तट नगर भर के कूड़े कचरे से पटे हैं। इन कूड़ों में मेडिकल कचरा भी फेंका गया है, जिसे जलाने से वातावरण प्रदूषित हो रहा है।
बावजूद इसके न तो कूड़े का निस्तारण कहीं अन्य किए जाने की व्यवस्था बन सकी है और न ही नगर पालिका परिषद प्रशासन इसके प्रति गंभीर है। यही हाल रहा तो जीवनदायिनी तमसा की हालत और बदतर हो जाएगी। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर पालिका प्रशासन के साथ ही पशु वधशाला को भी नोटिस भेजा है। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बता दें कि नगर में लगभग 21 बड़े नाले हैं। इनमें से 10 ऐसे बड़े नाले हैं, जिससे शहर के जल-मल सीधे तमसा में प्रवाहित हो रहा है। इसके अलावा पशु वधशाला से भी निकल रहे कचरों को तमसा नदी में ही बहाया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से एसकेपी ब्रह्मस्थान से मुरली सिनेमा हाल, टेढिय़ा मस्जिद से पुलिया गेट रेगुलेटर तक, डीएवी बंधा, नाला शारदा टाकिज, रैदोपुर चांदमारी, नाला लोचई की गली से रेगुलेटर नंबर चार से फराशटोला, नाला दड़बड़ टोली से दलालघाट, नाला हाइडिल चौक से पुराना पुल सिधारी नाला शामिल है।
इन नालों से होकर तमसा में गिरने वाले जल-मल की शुद्धि करने के लिए नगर पालिका के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की कोई योजना नहीं है। वहीं जल निगम द्वारा 1972 में शुरू किए
गए सीवर लाइन प्रोजेक्ट को पूरा नहीं किया गया। इस कारण करोड़ों की पाइप जमीन के नीचे बेकार दबी हुई है।