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बिजली पानी के अभाव में कांशीराम आास की बिल्डिंग खाली

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आजमगढ़। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर गरीब के सिर पर 2024 तक छत उपलब्ध कराने का सपना संजो कर जनपदों में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवासों का निर्माण करा रहे हैँ। वहीं मुबारकपुर विधानसभा क्षेत्र के गजहड़ा में करोड़ों की लगात से तैैयार कांशीराम आवास बिजली और पानी की व्यवस्था न होने के कारण खाली पड़ा है। वर्ष 2011-12 में कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना को तत्कालीन बसपा सरकार में मंजूरी मिली थी। मुबारकपुर नगर पालिका के गजहड़ा में 460 और नगर पंचायत मेंहनगर के देवरिया में 240 सहित कुल 700 आवास बनाने लिए 18.90 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई थी। निर्माण के लिए 75 फीसद धनराशि भी जारी हो गई थी। कार्यदायी संस्था आवास विकास परिषद ने कार्य शुरू करा दिया, जिसके बाद सरकार बदली तो 18 करोड़ 90 लाख रुपये की इस परियोजना का शेष 90 लाख रुपये निदेशालय को वापस करना पड़ा था। जबकि 18 करोड़ रुपये में दोनों स्थानों पर आवास के सभी आंतरिक कार्य तो करा दिए गए, लेकिन बाहरी कार्य पानी की टंकी, जलनिकासी के लिए ड्रेनेज और बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो सकी। नतीजा, गरीबों को आवंटन नहीं नहीं पा रहा है। गरीब डूडा और प्रशानिक अधिकारियों के कार्यालय के लगातार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन दस वर्षो बाद भी लगभग 500 आवास खाली रहने के बाद भी गरीबों कों आवास का आवंटन नहीं किया जा रहा है।
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कांशीराम आवास में आवंटन न होने से यह भवन अराजकतत्वों का अड्डा बन चुका है। अभी हाल ही में पुलिस द्वारा यहां पर अवैध शराब फैक्ट्री का भंडाफोड किया गया था। जिसमें कई लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। साथ ही काफी मात्रा में मादक माल भी बरामद हुआ था। आवास विकास परिषद अधिशासी अभियंता अंजनि गौतम ने बताया दस सालों से गरीब छत के लिए मोहताज है और अधिकारी एक दूसरे विभाग पर इसका दोष मढ़ रहे है। हमने डूडा को आवास बनाकर हैंडओवर कर दिया है। इसमें कुछ बाहरी काम होने बाकी हैं जिसमें बिजली, पानी आदि कार्य अवस्थापना मद से कराये जाने है, लेकिन कई वर्षो से इस मद में धनराशि ही नहीं आ रही है। फिर भी करीब 218 भवन आवंटित कर दिये गये है। वहीं डूडा पीओ एके पांडेय ने बताया कि हम खुद चाहते हैं कि खाली पड़े आवासों का आवंटन हो और लोग इसमें रहना शुरू करें। लेकिन यहां पर अभी ना तो बिजली है ना तो पानी की सुविधा है। जिसके कारण यहां किसी को आवास का आवंटन नहीं किया गया है।
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