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न्याय न मिला तो परिवार समेत जान दे दूंगा

Sun, 05 Jul 2015 01:01 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आजमगढ़
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आजमगढ़। मकान बिक गया, बच्चों की पढ़ाई छूट गई, उधार ले-लेकर आठ लाख रुपये चुका दिए फिर भी साहूकार का तीन लाख का कर्ज चुकता नहीं हुआ। रोज-रोज धमकियां मिल रही हैं। जहां काम मांगने जाता हूं, साहूकार के आदमी वहां पहुंचकर भड़का देते हैं। साहब, इतना सब होने के बाद भी अब अगर न्याय नहीं मिला तो परिवार समेत जान दे दूंगा। कुछ ऐसी ही पीड़ा लेकर कांशीराम आवास कालोनी में रहने वाले राम प्रकाश रस्तोगी मां, पत्नी और बच्चों के साथ पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचे। हालांकि एसपी से मुलाकात न होने पर उन्होंने एएसपी से गुहार लगाई। उन्होंने शहर कोतवाल को इस मामले की जांच सौंपी है।
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राम प्रकाश रस्तोगी शहर कोतवाली क्षेत्र के खत्रीटोला मुहल्ले के निवासी हैं। वह दो भाइयों में छोटे हैं। करीब सात वर्ष पूर्व पिता सुभाष चंद रस्तोगी की मौत हो गई। इसके बाद पिता द्वारा लिया गया कर्ज भी उन्हीं के जिम्मे आ गया, जबकि बड़े भाई ने इससे किनारा कर लिया। वह परिवार सहित अलग हो गए। राम प्रकाश के मुताबिक जब कर्जदार परेशान करने लगे तो उनसे छुटकारा पाने के लिए उन्होंने पुरानी कोतवाली मुहल्ले के एक साहूकार से 20 प्रतिशत ब्याज पर तीन लाख रुपये उधार लिए, लेकिन बाद में साहूकार 30 प्रतिशत ब्याज मांगने लगा। कर्ज चुकाने के लिए मुझे खत्रीटोला मुहल्ले में स्थित अपने पैतृक मकान बेचकर कांशीराम आवास कालोनी में आना पड़ा। इसके बाद भी कर्ज खत्म नहीं हुआ। बकौल राम प्रकाश, तीन लाख के एवज में अब तक कई लोगों से उधार लेकर आठ लाख रुपये चुका चुका हूं, लेकिन अब भी साहूकार रुपये के लिए आए दिन घर आकर धमका रहा है। पैसे की किल्लत के चलते मैंने एक वर्ष पूर्व बच्चों की पढ़ाई भी छुड़वा दी। राम प्रकाश के अनुसार आभूषण का अच्छा कारीगर होने के बावजूद मुझे कहीं काम नहीं मिल रहा क्योंकि जहां भी मैं काम मांगने जाता है वहां साहूकार के आदमी पहुंचकर भड़का देते हैं। एएसपी से उन्होंने कहा कि एक माह हो गए, मेरा परिवार तनाव के चलते ठीक से सो नहीं पा रहा हूं। आज मैं जेब में सल्फास की गोलियां लेकर इसीलिए आया था कि अगर मुझे न्याय न मिला तो मैं परिवार सहित जान दे दूंगा। राम प्रकाश की पीड़ा सुन एएसपी ने शहर कोतवाल को जांच सौंप दी।
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