हत्या के प्रयास के मामले में जेल में निरुद्ध पूर्व ब्लॉक प्रमुख फूलपुर और पूर्व सांसद रमाकांत यादव के भतीजे वीरेंद्र यादव की उपचार के दौरान बुधवार की शाम सदर अस्पताल में मौत हो गई। वह हत्या के प्रयास के मामले में नामजद थे। पवई थाने की पुलिस ने उन्हें 27 जनवरी को गिरफ्तार किया था। बुधवार की शाम वीरेंद्र यादव की जेल से रिहाई होने वाली थी।
दीदारगंज थानाक्षेत्र के सरांवा गांव निवासी वीरेंद्र यादव (43) पुत्र लल्लन प्रसाद यादव वर्ष 2000 से 2005 के बीच फूलपुर ब्लॉक से प्रमुख थे। इस दौरान पवई ब्लॉक से बृजलाल यादव की भाभी शोभावती देवी प्रमुख चुनी गई थी। इसके बाद इस सीट पर सरायपुल गांव निवासी बृजलाल का कब्जा हो गया।
बृजलाल लगातार दो बार प्रमुख रहे। लेकिन वर्ष 2010 में इस सीट पर वीरेंद्र ने अपनी पत्नी अर्चना को चुनाव लड़ाकर सीट पर कब्जा जमा लिया था। लेकिन इस बार के चुनाव में पवई की सीट आरक्षित होने के कारण वीरेंद्र ने अपनी पत्नी अर्चना को फूलपुर से चुनाव लड़ाया।
साथ ही पवई सीट से अपने समर्थित सुरजी देवी को चुनाव मैदान में उतारा था। इसी क्रम में बृजलाल ने अपने चालक की पत्नी मुन्नी देवी को चुनाव मैदान में उतारा। 27 जनवरी को एक बीडीसी को लेकर बृजलाल और वीरेंद्र के पक्ष के लोगों में विवाद के बाद फायरिंग हो गई।
इस मामले में बृजलाल पक्ष की ओर से हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसमें पूर्व सांसद रमाकांत यादव, पूर्व प्रमुख फूलपुर वीरेंद्र यादव सहित सात लोगों को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने वीरेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बताया जाता है जिस समय वीरेंद्र गिरफ्तार हुए, उनकी तबीयत खराब थी, वे एक दिन पूर्व पीजीआई से लौटे थे।
जेल में वीरेंद्र की हालत खराब हो गई। मंगलवार को जेल प्रशासन ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। हालत खराब देख डॉक्टरों ने उन्हें बीएचयू रेफर कर दिया। इसी बीच वीरेंद्र को जमानत मिल गई। वीरेंद्र ने रिहा होने के बाद उपचार के लिए जाने की बात कही। उन्हें मंगलवार की रात फिर जेल में रखा गया।
इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई। रिहाई बुधवार शाम को होने वाली थी, लिहाजा दिन में उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शाम चार बजे के करीब मौत हो गई। शव का पोस्टमार्टम के लिए गठित तीन सदस्यीय टीम में जिला अस्पताल के डा. बीएन सिंह यादव, डा. रामकेवल और डा. राजनाथ शामिल थे।
मौत के कारणों की जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर होगी। लेकिन पता चला है कि वे लंबे समय से बीमार थे। आज सुबह उनके पेट में दर्द हुआ, इसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार को अस्पताल में भर्ती होने के बाद उन्हें जेल क्यों भेजा गया, इसके बारे में जेल प्रशासन और डॉक्टर जानकारी दे सकते हैं। - विपिन ताड़ा, एएसपी नगर
चेकअप के बाद डॉक्टर ने उन्हें छोड़ दिया था। इस कारण उन्हें जेल में रखा गया। वैसे वीरेंद्र को पहले से हार्ट और लीवर की समस्या थी। - उमाकांत दोहर, जेलर
इलाज के अभाव में मौत का आरोप : अंबारी। वीरेंद्र यादव की मौत की सूचना मिलते ही सरांवा स्थित घर का मातम छा गया। नवनिर्वाचित ब्लॉक प्रमुख फूलपुर और उनकी पत्नी अर्चना ने आरोप लगाया कि अगर वह जेल न जाते तो उनकी मौत न होती। उपचार के अभाव में उनके पति की मौत हुई। उन्होंने सत्ता के दबाव पर पति को गिरफ्तार करने का आरोप पुलिस प्रशासन पर लगाया।
भारी सुरक्षा के बीच हुआ पोस्टमार्टम : पूर्व ब्लॉक प्रमुख की मौत होने की सूचना मिलते ही जिला और पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया। अस्पताल परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। सुरक्षा की दृष्टि से अस्पताल पर भारी संख्या में पीएसी के साथ चार थाने की पुलिस और स्थानीय कोतवाली पुलिस को तैनात किया गया। अंबारी बाजार में ऐहतियातन भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई थी।
अंबारी में मातम : अंबारी। मौत की सूचना जैसे ही अंबारी बाजार पहुंची, बाजार में सन्नाटा छा गया। दूकानदारों ने अपनी दूकानें बंद कर दी। शुभचिंतक जिला अस्पताल की तरफ अपना रुख किए। दो भाइयों में बड़े वीरेंद्र के छोटे भाई अरविंद की मौत दो वर्ष पूर्व नोएडा में कार दुर्घटना में हो गई थी।