आजमगढ़। डॉक्यूमेंट में फर्जीवाड़ा कर अफगानी नागरिकों का भारतीय पासपोर्ट बनाए जाने के मामले में 10 फरवरी तक का इंतजार करना होगा। डीआईजी के निर्देश पर जांच कर रहे आईपीएस की तरफ से वाराणसी जेल में निरुद्ध आरोपियों की रिमांड के लिए गुरुवार को अर्जी लगाए जाने के बाद सुनवाई के लिए 10 फरवरी की डेट मुकर्रर हुई है। अब अफगानी नागरिक के साथ ही साहबे आलम की रिमांड मिलने के बाद ही जांच आगे बढ़ेगी।
दो अफगानी नागरिक करमतुल्लाह व आबिद भारतीय पासपोर्ट बनवाने के लिए काफी दिनों से जिले में रह रहे थे। फूलपुर कोतवाली क्षेत्र के चमराडीह गांव निवासी साहबे आलम की मदद से इन लोगों ने दो ईंट भट्ठा मजदूरों के आईडी व अन्य डाक्यूमेंट में फर्जीवाड़ा कर फोटो बदलवा दिया। करमतुल्लाह चार माह पूर्व उन्हीं फर्जी डाक्यूमेंट के आधार पर भारतीय पासपोर्ट भी पाने में सफल रहा। वहीं अबिद पासपोर्ट आवेदन के बाद डाक्यूमेंट सत्यापन के लिए वाराणसी पासपोर्ट में पकड़ा लिया गया। इतना होने तक जनपद पुलिस को जिले में विदेशियों के होने से लेकर फर्जी पासपोर्ट बनवाने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। आबिद की गिरफ्तारी के बाद वाराणसी पुलिस ने जिले में छापेमारी कर इन अफगानियों के मददगार साहबे आलम को उठाकर वाराणसी चली गई। दोनों वर्तमान में वाराणसी जेल में बंद है। दूसरे अफगानी करमतुल्लाह को जनपद पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस व खुफिया विभाग की लापरवाही सामने आने लगी। डीआईजी ने आईपीएस इला मारन को प्रकरण की जांच दी। गुरुवार को वाराणसी न्यायालय में वहां की जेल में बंद अफगानी आबिद व साहबे आलम को रिमांड के लिए अर्जी दी गई। जिस पर 10 फरवरी की डेट सुनवाई के लिए पड़ी है इसके बाद ही फर्जी पासपोर्ट के मामले की जांच आगे बढ़ेगी।