आजमगढ़। माध्यमिक शिक्षा विभाग में विद्यालयों की मान्यता से जुड़े प्रकरण की जांच तेज हो गई है। संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) ने संदिग्ध मान्यता मामलों को गंभीरता से लेते हुए 21 विद्यालयों की मान्यता संबंधी फाइलें तलब कर ली हैं। मामले में आरोप है कि मानकों की अनदेखी कर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर की नई मान्यता के लिए विद्यालयों की संस्तुति की गई।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के संरक्षक रामजन्म सिंह ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि जिला विद्यालय निरीक्षक उपेन्द्र कुमार के चिकित्सकीय अवकाश पर रहने के दौरान वीरेंद्र प्रताप सिंह ने 11 दिसंबर 2025 से 23 जनवरी 2026 तक कार्यवाहक डीआईओएस का कार्यभार संभाला। इसी अवधि में भ्रष्टाचार के आधार पर 21 विद्यालयों की नई मान्यता की संस्तुति कर वर्ष 2025-26 में माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी भेजा गया। शिकायत में कहा गया है कि मान्यता प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण मानकों की अनदेखी की गई। इनमें मान्यता समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर, नेशनल बिल्डिंग कोड प्रमाणपत्र, अग्निशमन विभाग की अनुमति, एनएससी अभिलेख, भूमि संबंधी दस्तावेज और भवन मानकों की जांच शामिल है। मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए शासन को पत्र भेजा गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जेडी को जांच कर आख्या रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। डीआईओएस अजय कुमार ने 21 विद्यालयों की मान्यता संबंधी फाइलें जेडी कार्यालय को सौंप दी हैं। वर्तमान में पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।
21 विद्यालयों की मान्यता से संबंधित सभी अभिलेख तलब किए गए थे। प्राप्त शिकायतों के बिंदुओं की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। मान्यता प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर अनियमितता, तथ्य छिपाने या फर्जी अभिलेखों का प्रयोग पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पूरी कर रिपोर्ट परिषद को भेजी जाएगी।- नवल किशोर संयुक्त शिक्षा निदेशक, आजमगढ़।