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बिचौलियों, कोटेदारों की कट रही चांदी

Thu, 14 Jul 2016 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
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गेंहू चोरी - फोटो : self
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत जिले को चार प्रतिशत कम राशन का आवंटन हो रहा है। अनाज की कालाबाजारी और पात्रता सूची में अपात्रों का नाम होने की भी शिकायतें बड़े पैमाने पर मिल रही हैं। विभागीय लोगों, कोटेदारों और बिचौलियों की मिलीभगत से अनाज की कालाबाजारी की जा रही है। वहीं, कहीं-कहीं आपसी द्वेष के चलते भी कोटेदारों की खिलाफत की जा रही है।
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आलम यह है कि विभागीय गड़बड़ी के चलते करीब एक लाख परिवार राशन पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है। इसमें कई ऐसे लोग शामिल हैं, जिनका नाम लिस्ट से गायब कर दिया गया है या फिर ऑनलाइन राशन कार्ड के लिए आवेदन किए हैं। योजना के लाभ से वंचित लोग ब्लाक, तहसील, जिलापूर्ति और जिलाधिकारी कार्यालय का चक्कर लगा रहे। इनकी परेशानी से जहां गांव में रार बढ़ रही है। वहीं हक दिलाने वाले बिचौलियों की चांदी कट रही है।

जिलापूर्ति विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत 105783 लोगों का चयन अंत्योदय कार्डधारक के रूप में और 525936 लोगों का चयन पात्र गृहस्थी के तहत किया गया है। अंत्योदय कार्ड धारक को महीने में सस्ते दर पर 15 किलो चावल और 20 किलो गेहूं, तीन लीटर मिट्टी का तेल दिया जाता है। जबकि पात्र गृहस्थी कार्ड धारक को प्रतिव्यक्ति तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल और ढाई लीटर मिट्टी का तेल देने का प्रावधान है।
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शासन की तरफ से अंत्योदय कार्डधारकों के लिए 21156.60 क्विंटल गेहूं और 15867.45 क्विंटल चावल दिया जाता है। जबकि पात्र गृहस्थी के लिए 81405.69 क्विंटल गेहूं और 54270.46 क्विंटल चावल उपलब्ध कराया जाता है। अनाज का यह आवंटन मांग के सापेक्ष चार प्रतिशत कम हो रहा है। यानि डीएसओ कार्यालय से कार्ड धारकों के लिए 72 प्रतिशत खाद्यान्न की मांग होती है। इसके एवज में महज 68 प्रतिशत ही राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

सरकार की तरफ से ही चार प्रतिशत राशन कम दिया जा रहा। ऐसे में माल की ढुलाई की भरपाई करने और मुनाफा के लिए अनाज की कालाबाजारी की जा रही है। इसमें कोटेदार, बिचौलियों और विभागीय कुछ कर्मियों की मिलीभगत होती है। जिलापूर्ति विभाग की माने तो मार्च 2016 के पहले सप्ताह में ही सरकार ने राशनकार्ड की ऑनलाइन फीडिंग बंद कर दी। ऐसे में करीब एक लाख लोग ऐसे हैं, जो ऑनलाइन फीडिंग करके परेशान हैं। विभाग ऐसे लोगों का सत्यापन करवा रहा है लेकिन कभी इंटरनेट तो कभी वेबसाइट बंद होने से यह कार्य पूर्ण नहीं हो पा रहा। ऐसे में ऑनलाइन आवेदन करने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। इन्हें राशन दिलाने या कार्ड बनवाने के नाम पर बिचौलिए उपभोक्ताओं से लाभ उठा रहे हैं। 

प्रधानी चुनाव के बाद कोटा बना प्रमुख मुद्दा
कोटेदार के विरुद्ध शिकायत करने वाले कई लोग प्रधान बन गए। ऐसे लोगों पर चुनाव जीतने के बाद कोटेदार को हटाने का दवाब बनाया जा रहा लेकिन अधिकारियों की नजर में कोटेदार की छवि ठीक होने से उन्हें हटाया नहीं जा रहा। ऐसे में लोग कोटेदार के विरुद्ध लामबंद होकर तहसील, ब्लाक, जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर रहे। इस समस्या से शायद ही कोई गांव अछूता हो। जहां इसको लेकर गुटबाजी न हो। 

अनाज का आवंटन कम होने और ऑनलाइन आवेदनों के सत्यापन का काम चलने की वजह से यह समस्या उत्पन्न हो रही है। प्रतिदिन पूर्ति निरीक्षक, एसडीएम और तहसीलदार के यहां होने वाली शिकायतों में कोटेदार द्वारा घटतौली, राशन न देने और सूची में नाम न होने की समस्याओं का पता चल रहा। शिकायतों की जांच कर उसका निस्तारण करवाया जा रहा है।  - गौरीशंकर शुक्ला, जिलापूर्ति अधिकारी 
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