लाटघाट। घाघरा नदी में पानी का डिस्चार्ज 335000 क्यूसेक तक पहुंच गया है, जिससे जलस्तर 72.10 मीटर से ऊपर जाने की संभावना जताई जा रही है। जलस्तर बढ़ने की सूचना के साथ ही तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा फिर मंडराने लगा है। इसके साथ ही नदी के कटान की रफ्तार भी तेज हो गई है।
देवारा खास राजा और सहबदिया गांव में ज्यादा हो रही है। मात्र दो दिनों में 35 बीघा उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है। सहबदिया गांव के सामने हो रही कटान को रोकने के लिए बनाई गई 4.25 करोड़ रुपये की परियोजना भी नाकाम साबित हो रही है। इस परियोजना का सातवां स्पर नदी की तेज धारा में कटकर गिरने लगा है। बाढ़ खंड ने अस्थायी उपाय के तौर पर गैरेबियान डालकर कटान रोकने की कोशिश शुरू की है, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है। स्थानीय किसान जोखन सिंह पटेल ने बताया कि लगातार कटान के कारण उनकी उपजाऊ जमीन नदी में समा रही है। लगभग एक किलोमीटर के दायरे में कटान हो रही है। उनका कहना है कि जब करोड़ों रुपये की परियोजना कटान रोकने में असफल है, तो अस्थायी उपाय कितने कारगर होंगे। बाढ़ खंड के अवर अभियंता रामानंद और सहायक अभियंता ने मौके का दौरा किया। कटान और बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए लोगों ने ठोस और दीर्घकालिक उपाय किए जाने की मांग की। इस संबंध में अवर अभियंता रामानंद ने बताया कि कटान बड़े पैमाने पर हो रही है। सभी जगहों पर काम संभव नहीं है। हालांकि कटान रोकने के लिए गैरेबियान कुछ हद तक कारगर साबित हो रहा है।