लाटघाट। रौनापार थाना क्षेत्र के महड़ौर का पूरा (अराजी देवारा करखिया) गांव में शनिवार का दिन बेहद भावुक रहा।
यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान रूस में मृत हुए अरविंद (42) की पार्थिव शरीर तो स्वदेश नहीं पहुंच सका, लेकिन रूस सरकार की ओर से उनकी वर्दी, टोपी और डेथ सर्टिफिकेट गांव पहुंचने पर परिजनों का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा।
परिवार ने नम आंखों से वर्दी और अन्य सामान का अंतिम संस्कार की तरह दोहरीघाट मुक्तिधाम में विसर्जन किया। भाई वरुण कुमार ने बताया कि अरविंद वर्ष 2024 के फरवरी माह में अपने ही गांव के पड़ोसी रामचंद्र के साथ रूस गया था। कुछ समय बाद युद्ध के दौरान दोनों की मौत हो गई। करीब एक माह पहले रामचंद्र का शव गांव पहुंचा था, जबकि अरविंद के निधन की सूचना परिजनों को लगभग तीन माह पहले मिल गई थी। तबसे परिवार लगातार शव को भारत लाने का प्रयास कर रहा था, लेकिन सफलता नहीं मिली। परिजनों के अनुसार, रूस सरकार और भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क किया गया। इस प्रयास में जगदीप कुमार, अजहरुद्दीन और देव सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया।
शनिवार को राहुल और मुकेश वाराणसी एयरपोर्ट से अरविंद की वर्दी, टोपी और डेथ सर्टिफिकेट लेकर गांव पहुंचे। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी।