निर्देश के बावजूद राशन वितरण का प्रमाण पत्र न देने वाले आजमगढ़ और मऊ जिले के 49 ग्राम प्रधानों के विरुद्ध मंडलायुक्त के रविंद्र नायक ने दोनों जिलों के डीएम को जांच का आदेश दिया है।
साथ ही एक सप्ताह के भीतर जांच आख्या मांगी है, ताकि दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। कमिश्नर के इस आदेश से मंडल के दोनों जिलों के प्रधान और कोटेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।
राशन वितरण में गड़बड़ी की मिल रही शिकायतों से परेशान कमिश्नर ने आदेश दिया था कि सरकारी राशन वितरण का प्रमाण पत्र ग्राम प्रधान द्वारा दिए जाने के बाद ही अगले महीने के राशन का उठान होगा।
कमिश्नर का यह आदेश मंडल के आजमगढ़, मऊ और बलिया तीनों जिलों के ग्राम प्रधान और जिलापूर्ति अधिकारियों के लिए था। कमिश्नर के आदेश के बावजूद आजमगढ़ के 22 और मऊ जिले के 27 ग्राम प्रधानों ने राशन वितरण का प्रमाण पत्र कोटेदार को नहीं दिया।
इन गांव के कोटेदारों को प्रमाण पत्र न मिलने की वजह से गरीबों को राशन का उठान होने में परेशानी हो रही है। आजमगढ़ और मऊ जिले के 49 प्रधानों द्वारा कोटेदारों को राशन वितरण का प्रमाण पत्र न देने के पीछे मुख्य क्या वजह है?
क्या कोटेदारों से इनकी नहीं जमती या फिर प्रधान प्रमाण पत्र के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे हैं? आदि प्रमुख बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए मंडलायुक्त के रविंद्र नायक ने आजमगढ़ और मऊ जिले के इस प्रधानों की जांच कर दोनों जिलों के डीएम से एक सप्ताह के भीतर जांच आख्या मांगी है।
रिक्त 73 कोटे का डीएम करेंगे निर्धारण
आजमगढ़। मंडल के आजमगढ़ और मऊ जिले में कुल 73 गांव के कोटेदार का चयन अभी तक नहीं हो सका है। इन गांव के राशन कार्ड धारकों को राशन लेने के लिए दूसरे गांव के कोटेदार के यहां जाना पड़ता है।
मंडलायुक्त ने इन दोनों जिलों के जिलापूर्ति अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जल्द कोटेदारों का चयन कर उसकी रिपोर्ट डीएम के यहां भेंजे। डीएम की अनुमति के बाद ही चयन मान्य होगा।
इसमें आजमगढ़ जिले के 38 गांव और मऊ जिले के 38 गांव शामिल है। डीएम की अनुमति मिलने के बाद ही कोटेदार का चयन मान्य होगा। जिन गांव में कोटे की दूकानें रिक्त पड़ी हैं। वहां के कोटेदार के चयन के लिए तिथि निर्धारित कर दी गई है। निश्चित तिथि पर गांव में खुली बैठक आयोजित करके चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
प्रधान और कोटेदार मिल कर रहे कालाबाजारी
आजमगढ़। जांच पड़ताल के दौरान पता चला कि पहले कोटेदार राशन बचाकर कालाबाजारी कर देते थे, लेकिन ग्राम प्रधान द्वारा प्रमाण पत्र देने का निर्देश मिलने के बाद कई-कई गांव में अब प्रधान और कोटेदार मिलकर कालाबाजारी कर रहे हैं।
जिस गांव में यह व्यवस्था नहीं चल पा रही है। वहां के प्रधान और कोटेदारों में खिंचतान के चलते प्रधान प्रमाण पत्र नहीं दे रहे और इन दोनों के बीच गांव की गरीब जनता पीस रही है।
पूव में राशन उठान की यह थी प्रक्रिया
आजमगढ़। जिलापूर्ति अधिकारी देवमणि मिश्रा ने बताया कि पूर्व में राशन उठाने के लिए संबंधित गांव के प्रशासनिक समिति द्वारा किया जाता था।
समिति के अध्यक्ष ग्राम प्रधान, सेक्रेटरी और सदस्यों की अनुमति के बाद कोटेदार राशन का उठान करता था, लेकिन जारी नए आदेश के क्रम में गांव के प्रशासनिक समिति के अध्यक्ष ग्राम प्रधान द्वारा प्रमाण पत्र दिए जाने के बाद राशन का उठान होना है। ऐसे में यदि प्रधान और कोटेदार आपस में मिलकर कुछ भी गुल खिला सकते हैं।
आजमगढ़ और मऊ के 49 ग्राम प्रधानों ने राशन उठान के लिए कोटेदार के प्रमाण पत्र नहीं दिया है। इसके पीछे मुख्य वजह क्या है। इसकी जांच का आदेश दोनों जिलों के डीएम को देते हुए एक सप्ताह के भीतर जांच आख्या मांगी गई है। रिपोर्ट में जो भी दोषी होगा। उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। - के. रविंद्र नायक, मंडलायुक्त, आजमगढ़ मंडल