फूलपुर के मेजवा में नौहा मातम कर खिराजे अकीदत पेश करते अजादार।
- फोटो : AZAMGARH
मेजवां। फूलपुर और ग्रामीण इलाकों में मोहर्रम के मद्देनजर मजलिसों का सिलसिला शुरू हो गया है। पहली मोहर्रम शुक्रवार को शिया आबादी वाले इलाकों में कई मजलिस आयोजित की गई। इसमें अजादारों ने नौहा-मातम पेशकर करबला में शहीद इमाम हुसैन को खिराजे अकीदत पेश की।
दसमड़ा गांव में पहली मोहर्रम को मौलाना सैयद मासूम रजा ने मजलिस को खिताब किया। मेजवां और चमावां गांव में मौलाना फ़रहत हुसैन ने मजलिस पेश किया। अंजुमनों ने नौहा-मातम पेश कर खिराजे अकीदत पेश की। मौलाना मासूम रजा ने कहा कि इमाम हुसैन इंसानियत का नाम है। उन्होंने अपनी अजीम कुर्बानी देकर इस्लाम को बचाया। जनाबे जैनब ने ही पूरी दुनिया को बताया कि करबला में इमाम हुसैन ने कुरबानी देने का मकसद क्या था। मौलाना फ़रहत हुसैन ने कहा कि इमाम हुसैन सिर्फ 72 की फौज लेकर इंसानियत को बचाने के लिए करबला के मैदान में उतरे और तीन लाख की फौज का मुकाबला किया। यहां तक कि यजीदी फौजों ने नहरे फोरात पर कब्जा कर लिया था। इसके चलते लोग पानी के तरस गए। मजलिस में लोग गम का प्रतीक काला लिबास पहन कर आए हुए थे। इस दौरान सोशल डिसटेंसिंग का ख्याल रखा गया था। शाहजेरपुर, कुशल गांव, डिघीया, खपड़ा गांव आदि स्थानों पर भी मजलिसे आयोजित की गईं।