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इमाम हुसैन ने हर जुल्म का मुकाबला सब्र और हिम्मत से की

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सरायमीर। सातवीं मोहर्रम को विभिन्न इमामबाड़ों और घरों में इमाम हसन के बेटे हजरत कासिम की शहादत की याद में मजलिस और मातम हुआ। मौलाना मासूम असगर ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इस्लाम का आतंकवाद से कोई संबंध नहीं है। जो जेहाद और इस्लाम के नाम पर आतंकी घटनाएं हो रही है। यह इस्लाम को बदनाम करने की कोशिश है। सही इस्लाम हजरत मोहम्मद (स.) और उनकी औलाद और उनके साथियों से मिलेगा। इस्लाम अमन, शांति, भाईचारा, मेल और मुहब्बत से रहने का मजहब है। रसूल के नवासे इमाम हुसैन ने हर जुल्म का मुकाबला सब्र और हिम्मत से करके अपने नाना के लाए हुए दीन की रक्षा की और मानवता की लाज रखी। आखिर में मौलाना ने जनाब कासिम की करबला के मैदान में शहादत व उनकी लाश पर यजीदी फौज के ओर से घोड़े दौड़ा कर पामाल किए जाने का मंजर बयान किया तो मातमदारों की आंखों से आंसू आ गए। मजलिस में शिया कमेटी के अध्यक्ष कायम रजा, वकील हुसैन,गुल्शन रजा व हमनवा ने नौहा पेश करके माहौल को सोगवार बना दिया।
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