तहसील के नत्थूपुर गांव के कारगिल शहीद रमेश यादव की बहनों को प्रतिवर्ष समाजसेवी इफ्तेखार आजमी राखी बधवाना और मकरसंक्रांति पर खिचड़ी देना नहीं भूलते हैं। 16 वर्षों से यह परम्परा निभाते चले आ रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी वह शहीद रमेश के घर पहुंचे और उसकी बहनों से राखी बंधवाने के साथ उपहार दिए।
जीयनपुर स्थित नवोदय विद्यालय में वार्डेन के पद पर तैनात इफ्तेखार आजमी उस समय से यहां आते हैं जबसे रमेश कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुआ। 1999 में कारगिल युद्ध में रमेश यादव शहीद हो गए, लेकिन क्षेत्रीय विवाद के कारण उन्हें कारगिल शहीद का दर्जा नहीं मिला। सरकार से मिलने वाली सारी सुविधाओं से वंचित हो गए। इकलौते पुत्र को खोने के गम में पिता सीताराम यादव भी चल बसे। रमेश की दो बहनों चंद्रकला व शशिकला के सर से भाई का साया उठ गया। उन्हें हर मौके पर भाई की कमी खलने लगी।
इसकी जानकारी हुई तो इफ्तेखार आजमी आगे आए। उन्होंने ठाना कि शहीद की बहन का सगा भाई रमेश तो नहीं बन सकता पर भाई की जिम्मेदारी हर स्तर पर निभा सकते हैं। रमेश की बहनों को अपनी बहन मान वह हरसाल राखी बंधवाते हैं। शहीद की बहनों ने भी इन्हें कभी अपने भाई से इतर नहीं समझा। मजहब के बंधन तोड़ इफ्तेखार की इस परंपरा को लोग सराहते हैं।