मेस में खराब खाना खिलाने का विरोध करने पर राजकीय पालीटेक्निक हर्रा की चुंगी के सौ छात्रों को शनिवार की सुबह हॉस्टल से निकाल दिया गया। सड़क पर आए परेशान छात्रों ने सुबह आठ बजे कलक्ट्रेट का घेराव कर लिया। एसडीएम सदर ने मौके पर पहुंच कर छात्रों की बात सुनी। फिर जिलाधिकारी के निर्देश के बाद पॉलीटेक्निक प्रबंधन ने उन्हें हॉस्टल में वापस लिया।
राजकीय पालीटेक्निक हर्रा की चुंगी के हॉस्टल के छात्रों ने आरोप लगाया कि मेस में सड़े मटर और गोभी की सब्जी खिलाई जा रही है। उन्होंने इसका विरोध शुरू किया तो हॉस्टल में न सिर्फ खाना बनाना बंद कर दिया गया बल्कि इंटरनल परीक्षा में नंबर काटने और करियर खराब करने की धमकी दी गई। शुक्रवार की रात सभी को शनिवार सुबह हास्टल खाली करने का फरमान जारी कर दिया गया। शनिवार को सुबह छात्रों को हॉस्टल से निकाल भी दिया गया।
परेशान छात्रों ने सुबह आठ बजे कलक्ट्रेट का घेराव कर वहीं बैठ गए। शनिवार को कमिश्नर कलक्ट्रेट का निरीक्षण करने भी आने वाले थे। मामले की जानकारी डीएम को मिली तो उन्होंने एसडीएम सदर को मौके पर भेजा। छात्रों ने एसडीएम सदर को बताया कि हॉस्टल में प्रति छात्र मेस में खाने के लिए दो हजार रुपये लिए जाते हैं।
लेकिन इसके एवज में घटिया खाना खिलाया जा रहा है। छात्रावास में कोई व्यवस्था नहीं दी जा रही है। शौचालय के दरवाजे टूटे हुए हैं। शुक्रवार को सड़े खाने का विरोध कर छात्रों ने खाने से इंकार कर दिया तो खाना बनाना बंद कर दिया गया।
खराब खाने को लेकर बच्चों ने शुक्रवार शाम को हंगामा किया था। सब्जी खराब थी तो दूसरी सब्जी बनवाने का आश्वासन दिया गया। लेकिन छात्र हंगामा करते रहे। गाली गलौज भी की। इसपर उन्हें हॉस्टल खाली करने को कहा गया था। डीएम के निर्देश के बाद उन्हें वापस ले लिया गया है। खाना अब वो बाहर खाएंगे। -सुभाष शुक्ला, प्रभारी प्रधानाचार्य
छात्रों ने अपने खाने से संबंधित समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन जिलाधिकारी को संबोधित था। इसे जिलाधिकारी के पास भेज दिया गया है। उन्हीं के स्तर से कार्रवाई की जाएगी। -प्रशांत कुमार, एसडीएम
छात्राओं ने भी की खराब खाने की सिकायत
पास ही स्थित बालिका छात्रावास में पहले तो वार्डेन ने किसी को घुसने नहीं दिया। कहा कि प्रिंसिपल ने मना किया है। बाद में किसी तरह व पत्रकारों को अंदर ले गईं तो छात्राएं शिक्षिका की उपस्थिति में कुछ बोलने से कतराती रहीं। उनके हटने पर बताया कि खाना अक्सर खराब मिलता है। शिकायत करने पर नंबर काटने की धमकी दी जाती है।
10 शौचालय में दो ही सही
बालक छात्रावास में थर्ड ईयर के 160 छात्रों के बने 10 शौचालय में आठ के दरवाजे टूटे हुए थे। सिर्फ दो शौचालय के दरवाजे ही सही थे। छात्रों ने बताया कि मजबूरी में या तो बाहर खुले में शौच के लिए जाते हैं। अंदर जाने पर दरवाजे को हाथ से पकड़कर बैठना पड़ता है। छात्रों के कमरों की खिड़की में शीशा नहीं थी। छात्रों ने बताया कि ठंड के समय में वो बोरा लगाकर कमरे में सोते हैं।
जानकारी होते ही हटाया सामान, की सफाई
छात्रों के कलक्ट्रेट पहुंचने की जानकारी जैसे ही हॉस्टल प्रबंधन को मिली उन्होंने हास्टल के मेस से सड़ी हुई सब्जियां आदि हटवा दी। हालांकि छात्रों ने मोबाइल से पहले ही इसकी फोटो खींच ली थी, इसलिए उनकी पोल खुल गई। मीडिया वालों के पहुंचने से पहले की हॉस्टल की धुलाई आदि कर साफ-सफाई कर दी गई।
मीडिया के सामने भी छात्रों को देते रहे गाली
छात्रों के विरोध की जानकारी के बात मीडियाकर्मी हास्टल में जानकारी लेने के लिए पहुंचे। यहां मौजूद मेस ठेकेदार और शिक्षक मीडिया के सामने ही छात्रों को गाली देते नजर आए। यहां तक की गलती का ठीकरा विद्यार्थियों पर फोड़ने के लिए उन्हें चरित्रहीन की संज्ञा भी दी गई।
छात्रों की कहानी उन्हीं की जुबानी
आजमगढ़। हास्टल के छात्रों ने बताया कि कुछ माह पहले तक मेस में क्या बनेगा क्या नहीं इसकी चयन छात्रों की टीम करती थी। वहीं सामान खरीद कर लाते थे। प्रतिमाह प्रति छात्र 14 सौ से 15 सौ का खर्च आता था। नये प्रिंसिपल ने यहां ठेकेदारी सिस्टम कर दिया। दो हजार लिया जाता है, लेकिन सड़ा-गला सामान खिलाया जाता है। विरोध पर धमकाया जाता है।