बलिया। खोरीपाकर गांव निवासी संजय कुमार ने चार माह पूर्व तबीयत खराब होने पर चिकित्सक की सलाह पर खून व एचआईवी की जांच निजी पैथोलॉजी में कराया। जांच रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई। चिकित्सक को शंका होने पर उन्होंने जिला अस्पताल व वाराणसी के लैब में जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। पता चला कि उक्त पैथोलॉजी में डीएमएलटी की जगह अप्रशिक्षित कर्मी जांच करता है। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी, पीएचसी के बाहर तमाम बिना रजिस्ट्रेशन या बिना रेडियोलॉजिस्ट के पैथोलॉजी व अल्ट्रासाउंड का संचालन चल रहा है। रजिस्टर्ड जांच केंद्रों में भी बिना डीएमएलटी व रेडियोलाॅजिस्ट के जांच की जा रही है।
बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे 214 पैथोलॉजी व 68 अल्ट्रासाउंड केंद्र
विभाग की माने तो जांच से लेकर रिपोर्ट देने तक रेडियोलॉजिस्ट होने चाहिए। जिले में 279 पैथोलॉजी व 108 अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित होते हैं। जिसमें सीएमओ कार्यालय में 65 पैथोलॉजी व 40 अल्ट्रासाउंड रजिस्टर्ड है। बिना रजिस्ट्रेशन के 214 से अधिक पैथोलॉजी व 68 से अधिक अल्ट्रासाउंड केंद्र का संचालन हो रहा है। अप्रशिक्षित मरीजों की जांच कर उन्हें गलत रिपोर्ट दे रहे हैं। रिपोर्ट के आधार पर इलाज करने से मरीज की सेहत खराब हो जा रही है।
बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित पैथोलॉजी या अल्ट्रासाउंड के खिलाफ कार्रवाई इस वर्ष नहीं हुई है। जांच टीम के पहुंचने के पूर्व संचालक ताला बंद कर भाग जाते हैं। शिकायत मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई तय है। डॉ. योगेन्द्र दास, डिप्टी सीएमओ बलिया।
शहर के प्रतिष्ठित अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र ने गर्भवती की जांच में बच्चा खराब होने की रिपोर्ट दे दी। महिला चिकित्सक को शंका होने पर उन्होंने दूसरी जगह जांच कराई तो बच्चा स्वस्थ था। परिजनों ने इसकी शिकायत की लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
नगवा निवासी माधुरी देवी को पेट में दर्द की शिकायत पर जिला अस्पताल के सर्जन को दिखाया। सलाह पर अल्ट्रासाउंड कराने पर रिर्पोट में पथरी निकली। चिकित्सक ने जांच रिर्पोट के आधार पर ऑपरेशन की तारीख तय कर दी। उसके पूर्व खून व अल्ट्रासाउंड जांच की सलाह दी। जांच रिपोर्ट में पथरी नहीं मिली। इंफेक्शन की दवा चलाने के बाद राहत मिल गई।