विनय का आरोप है कि जब वह मरीज को एंबुलेंस में ले जा रहे थे, तब अस्पताल के डॉक्टर ने पहले से लगाए गए पेसमेकर को खींचने का प्रयास किया। जब उन्होंने विरोध किया तो अस्पताल कर्मियों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। उन्होंने कहा कि पेसमेकर का 22 हजार पहले ही जमा किया जा चुका था, जिसकी रसीद उनके पास है। बताया कि भर्ती के बाद से अस्पताल में भर्ती के बाद से 50 हजार से अधिक रुपये चिकित्सक ले चुके हैं।
अस्पताल संचालक ने बताया आरोप निराधार : विनायक अस्पताल के चिकित्सक डा. विनय चौहान ने कहा कि मरीज गंभीर हालत में लाया गया था। उसे अस्थायी पेसमेकर लगाकर राहत दी गई थी। परिजनों ने स्वयं मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया और एंबुलेंस में पेसमेकर बदलते समय मरीज को दोबारा अटैक आया। उन्होंने कहा कि मारपीट का आरोप गलत और निराधार है। अस्पताल स्टाफ ने किसी से हाथापाई नहीं की।